राजस्थान की भजनलाल सरकार की महत्वाकांक्षी फ्री इलाज योजना, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAA), प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। सरकारी अस्पतालों के अधिकारियों और कर्मचारियों की ढिलाई के कारण बीमा कंपनियां करोड़ों रुपए के क्लेम रिजेक्ट कर रही हैं। मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के कमिश्नर नरेश कुमार गोयल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के 28 बड़े सरकारी अस्पतालों के अधीक्षकों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है और 3 दिन में जवाब तलब किया है।
रिजेक्शन का गणित: सिरोही और बीकानेर की स्थिति सबसे खराब
योजना के तहत मरीज के इलाज का पैसा बीमा कंपनी सीधे अस्पताल के खाते में डालती है, लेकिन अधूरी जानकारी और दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने के कारण ये क्लेम खारिज हो रहे हैं।
- सिरोही मेडिकल कॉलेज: यहां सबसे ज्यादा 48.38% क्लेम रिजेक्ट हुए हैं, जिससे अस्पताल को ₹1.72 करोड़ का नुकसान हुआ है।
- बीकानेर (प्रभारी जिला, चिकित्सा मंत्री): चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के प्रभारी जिले बीकानेर की हालत चिंताजनक है। यहां के चिल्ड्रन हॉस्पिटल में 41.86% और महिला अस्पताल में 38.77% क्लेम रिजेक्ट हुए हैं।
- जयपुर: राजधानी के सांगानेरी गेट महिला अस्पताल (37.16%) और चांदपोल जनाना अस्पताल (26.03%) भी इस लिस्ट में ऊपर हैं।
प्रमुख अस्पतालों की रिजेक्शन रिपोर्ट (प्रतिशत में)
| जिला/अस्पताल | रिजेक्शन दर (%) |
| सिरोही (मेडिकल कॉलेज) | 48.38% |
| बाड़मेर (जिला अस्पताल) | 45.56% |
| बीकानेर (चिल्ड्रन हॉस्पिटल) | 41.86% |
| जयपुर (सांगानेरी गेट महिला) | 37.16% |
| सीकर (एस.के. अस्पताल) | 30.68% |
| झालावाड़ (सामान्य अस्पताल) | 21.01% |
क्या होगा असर?
क्लेम रिजेक्ट होने का सीधा मतलब है कि अस्पतालों को इलाज के बदले पैसा नहीं मिल रहा है, जिससे अस्पतालों के विकास कार्यों और संसाधनों पर बुरा असर पड़ रहा है। सरकार अब यह जांच कर रही है कि क्या यह केवल मानवीय भूल है या इसके पीछे कोई गहरी मिलीभगत।