भोपाल के आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कुल 7 नए प्रतिवादियों को मामले में शामिल करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित की गई है।
यह मामला मूल रूप से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से जुड़ा है। पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने मार्च 2023 में आदमपुर खंती में आग की घटनाओं को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की थी। एनजीटी ने 31 जुलाई 2023 को भोपाल नगर निगम पर पर्यावरण क्षति के लिए 1 करोड़ 80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
नगर निगम ने इस जुर्माने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। हालिया सुनवाई में कोर्ट ने नगर निगम की माफी की मांग को खारिज करते हुए कहा कि नए नियम (2026 के) लाना सराहनीय कदम है, लेकिन जिम्मेदार संस्थाओं को पहले बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के नए नियम भी जमीनी स्तर पर सुधार नहीं ला पाएंगे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ठोस कचरा प्रबंधन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। इसीलिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, पंचायती राज, आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के सचिवों, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया गया है।
इससे पहले 16 मई 2025 को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) ने सुप्रीम कोर्ट में 80 पेज की विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आसपास के क्षेत्र में भूजल में आयरन की मात्रा सामान्य से 100 गुना अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पानी न केवल पीने के लिए अयोग्य है, बल्कि सब्जी और फसलों की सिंचाई के लिए भी हानिकारक है।
भोपाल शहर से प्रतिदिन करीब 850 टन कचरा निकलता है, जिसमें से लगभग 800 टन आदमपुर खंती पहुंचता है। इसमें से 290 टन मिट्टी जैसा कचरा होता है, जबकि बाकी 510 टन मिश्रित कचरा है। नगर निगम की प्रोसेसिंग यूनिट की क्षमता मात्र 420 टन है, जिससे बड़ी मात्रा में कचरा अनप्रोसेस्ड रह जाता है और ढेर लगता जा रहा है। खंती के आसपास करीब 12 हजार लोगों की आबादी रहती है, जो लगातार प्रदूषण और आग की घटनाओं से प्रभावित है।