ओवैसी बोले- वंदे मातरम वफादारी का टेस्ट नहीं, संविधान ‘हम लोग’ से शुरू होता है

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर केंद्र सरकार के नए दिशानिर्देशों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक हालिया इंटरव्यू में ओवैसी ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना या इसका सम्मान करना किसी भी व्यक्ति की देशभक्ति का मापदंड नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बीजेपी और आरएसएस पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये संगठन देश को एक धार्मिक राष्ट्र (थियोक्रेटिक नेशन) बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना “हम भारत के लोग” से शुरू होती है, न कि “भारत माता की जय” जैसे नारों से। उन्होंने अनुच्छेद 25 का जिक्र करते हुए धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की रक्षा पर बल दिया और कहा कि देशभक्ति का कोई प्रमाण-पत्र किसी से नहीं चाहिए।

यह विवाद तब और तेज हो गया जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में (फरवरी 2026 में) ‘वंदे मातरम’ के लिए नए प्रोटोकॉल जारी किए। इन नियमों के तहत अब सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के पूरे छह छंदों (अंतरों) का गायन या वादन अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है। पहले आमतौर पर केवल पहले दो छंद ही गाए जाते थे। नए आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत दोनों बजाए जाते हैं, तो ‘वंदे मातरम’ पहले होगा तथा श्रोताओं को खड़े रहना अनिवार्य है।

ओवैसी ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने जस्टिस कपूर आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि आयोग ने सावरकर को महात्मा गांधी हत्या की साजिश में शामिल बताया था।

इसके अलावा, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘कयामत’ शब्द के इस्तेमाल पर व्यंग्य किया और कहा कि कम से कम मुख्यमंत्री को उर्दू के एक शब्द का हिंदी अर्थ पता होना चाहिए।

राजनीतिक मुद्दों पर ओवैसी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़े किसी अविश्वास या विशेषाधिकार प्रस्ताव में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया। तेलंगाना की राजनीति पर बोलते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि भाजपा चुनावों में उनका नाम इतनी बार लेती है कि लगता है उन्हें वे काफी पसंद करते हैं।