आज रविवार को देशभर में महाशिवरात्रि बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। यह हिंदू कैलेंडर का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पड़ने वाली यह “शिव की महान रात्रि” आध्यात्मिक जागृति, आत्म-चिंतन और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक मानी जाती है।
इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि दोपहर 5:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे तक रहेगी। निशिता काल पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त रात 11:43 बजे से 12:36 बजे तक (कुछ स्थानों पर थोड़ा भिन्न) है, जब भक्त शिवलिंग पर विशेष अभिषेक करते हैं।
भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं, जिसमें फलाहार या निर्जला उपवास शामिल होता है। रात्रि भर जागरण (शिवरात्रि जागरण) किया जाता है, जिसमें भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक, बेलपत्र, दूध, शहद, जल और अन्य पवित्र सामग्री से शिवलिंग का स्नान, “ॐ नमः शिवाय” मंत्र जाप और ध्यान प्रमुख हैं। यह पर्व अन्य त्योहारों से अलग है, जहां उत्सव कम और संयम-तपस्या अधिक होती है।
देश के प्रमुख शिव मंदिरों जैसे उज्जैन का महाकालेश्वर, वाराणसी का काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, सोमनाथ और त्र्यंबकेश्वर में भव्य आयोजन हो रहे हैं। लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं। ईशा योग केंद्र (कोयंबटूर) में सद्गुरु के साथ विशेष कार्यक्रम चल रहा है, जिसमें संगीतमय प्रस्तुतियां और ध्यान सत्र शामिल हैं।
महाशिवरात्रि पर भक्तों की मान्यता है कि इस रात पूजा-अर्चना से पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह पर्व योग, ध्यान और आंतरिक शांति का महत्व भी सिखाता है।
देशभर के मंदिरों और घरों में भक्त “हर हर महादेव” के नारे लगा रहे हैं। यह त्योहार हिंदू धर्म में आस्था, भक्ति और आध्यात्मिकता का प्रतीक बना हुआ है।