रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि यह समिट भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इतिहास में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक क्षण साबित होगा।
उन्होंने अपने संबोधन में जोर दिया कि यह आयोजन देश को एआई क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेगा और विकास की गति को कई गुना तेज करेगा। अंबानी का मानना है कि इससे भारत 21वीं सदी में दुनिया की प्रमुख एआई शक्तियों में से एक के रूप में उभरेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एआई पावर्ड भारत’ के विजन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण न केवल भारत के लिए, बल्कि ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के लिए भी एक आदर्श मॉडल साबित होगा। मुकेश अंबानी ने एआई को महज एक नई तकनीक नहीं, बल्कि मानव जैसी सोच और समझ वाली प्रणालियों का निर्माण बताया। उन्होंने इसे “हर यंत्र को शक्ति देने वाला मंत्र” करार दिया, जो उत्पादकता और दक्षता को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा सकता है। एआई की तुलना उन्होंने पौराणिक “अक्षयपात्र” से की, जो असीमित संभावनाएं और समृद्धि प्रदान करने वाली शक्ति है।
अंबानी ने वैश्विक चुनौती पर प्रकाश डालते हुए पूछा कि क्या दुनिया अलग-अलग राष्ट्रों की तरह अलग-थलग रहेगी या एकजुट वैश्विक परिवार की तरह काम करेगी? यदि एआई केवल विकसित (ग्लोबल नॉर्थ) देशों तक सीमित रहा, तो असमानता और बढ़ेगी। लेकिन एक ऐसा भविष्य संभव है जहां एआई सभी के लिए सुलभ और समावेशी बने।
भारत की मजबूतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, विशाल जनसंख्या और डिजिटल बुनियादी ढांचे के मामले में भारत का कोई सानी नहीं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेटा उपभोक्ता बन चुका है और अब शहरों से लेकर दूरदराज के गांवों तक डिजिटल सेवाओं में कोई खास अंतर नहीं बचा है। जियो ने 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों को इंटरनेट से जोड़कर देश को डिजिटल युग में प्रवेश कराया और अब यह “इंटेलिजेंस युग” की ओर अग्रसर है।
एआई की सबसे बड़ी बाधा कंप्यूटिंग पावर की कमी और उसकी अधिक लागत बताते हुए अंबानी ने घोषणा की कि जियो इंटेलिजेंस स्वदेशी कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है, जिसमें मल्टी-गीगावॉट स्तर की क्षमता होगी। इस साल 120 मेगावॉट क्षमता शुरू की जाएगी।
रोजगार पर चर्चा करते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि एआई नौकरियां छीनने के बजाय नए और उच्च कौशल वाले अवसर पैदा करेगा। उन्होंने जोर दिया कि बुद्धिमत्ता को संवेदनशीलता के साथ जोड़कर ही हम सभी के लिए एक बेहतर और समृद्ध भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।