प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में डीपफेक जैसी चुनौतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि एआई जनरेटेड कंटेंट पर लेबल या वॉटरमार्क लगना चाहिए ताकि लोग असली और नकली सामग्री में फर्क कर सकें। उन्होंने जोर दिया कि एआई का इस्तेमाल पारदर्शी और सुरक्षित होना चाहिए, जिसमें डीपफेक, अपराध और आतंकवादी गतिविधियों पर सख्त रोक लगे।
समिट के दौरान गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि एआई आने वाले समय में अरबों लोगों की जिंदगी को पूरी तरह बदल देगा। उन्होंने भारत के एआई प्रयासों की सराहना की और कहा कि गूगल भारत के प्रतिभाशाली युवाओं के साथ मिलकर काम करेगा, जिसमें ‘कर्मयोगी भारत’ मिशन के तहत 2 करोड़ कर्मचारियों को एआई ट्रेनिंग देने की योजना शामिल है।
पीएम मोदी ने पिचाई से अलग मुलाकात में भारत के एआई इकोसिस्टम, छात्रों और पेशेवरों के साथ सहयोग पर चर्चा की। समिट में डीपफेक से जुड़ी बढ़ती समस्या पर वैश्विक सहमति बनाने पर जोर दिया जा रहा है। भारत ने पहले ही एआई-जनरेटेड कंटेंट पर वॉटरमार्किंग के नियम अधिसूचित किए हैं, और अब और मजबूत सुरक्षा उपायों पर विचार हो रहा है।