भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों को और अधिक सटीक, पारदर्शी तथा अद्यतन बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। गुरुवार (19 फरवरी 2026) को आयोग ने शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को पत्र लिखकर इस अभियान की तैयारियों की समीक्षा की और उन्हें जल्द से जल्द सभी पूर्व तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, SIR का यह तीसरा चरण अप्रैल 2026 से शुरू होने की संभावना है। आयोग का लक्ष्य मतदाता सूची से मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना तथा पात्र नए मतदाताओं, खासकर युवाओं को जोड़ना है।
प्रक्रिया के चरण और कवरेज
- पहला चरण: बिहार में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
- दूसरा चरण: अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 12 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया, जिसमें लगभग 60 करोड़ मतदाताओं का डेटा कवर हो चुका है।
- तीसरा चरण: अब शेष 22 क्षेत्रों (लगभग 39 करोड़ मतदाता) को लक्षित किया जा रहा है। इनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड जैसे बड़े राज्य तथा दिल्ली, लद्दाख, चंडीगढ़ आदि केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
हालांकि, पिछले अनुभवों के आधार पर आयोग सभी 22 क्षेत्रों को एक साथ शामिल करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां विधानसभा चुनाव निकट हैं (जैसे मणिपुर और उत्तराखंड में मार्च 2027 तक कार्यकाल समाप्ति)।
प्रमुख चुनौतियां
इस अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2027 की जनगणना से टकराव है। जनगणना का हाउसलिस्टिंग कार्य 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच प्रस्तावित है, और दिल्ली, हरियाणा, ओडिशा जैसे कुछ राज्यों ने अपनी समय-सीमा भी अधिसूचित कर दी है। दोनों प्रक्रियाओं में जमीनी स्तर पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों और संसाधनों की जरूरत पड़ती है, इसलिए राज्यों को या तो जनगणना की तारीखों में बदलाव करना होगा या आयोग से अनुरोध करना होगा कि उन्हें बाद के चरण में रखा जाए।