CJI का NCERT पर सख्त एक्शन: ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ अध्याय पर सख्त कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय पर गंभीर आपत्ति जताई है। बुधवार को अदालत में सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि न्यायपालिका जैसी संस्था को बदनाम करने की किसी को भी इजाजत नहीं दी जाएगी और कानून अपना रास्ता अपनाएगा।

सीजेआई ने इस मामले को स्वतः संज्ञान लेने का संकेत देते हुए कहा कि यह कदम सोचा-समझा और सुनियोजित प्रतीत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे खुद इस पूरे प्रकरण की निगरानी करेंगे। सीजेआई ने कहा, “मैंने मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपना कर्तव्य निभाया है और संज्ञान लिया है। बार और बेंच दोनों चिंतित हैं। सभी हाईकोर्ट के न्यायाधीश परेशान हैं। मुझे कई फोन और संदेश मिल रहे हैं। कृपया कुछ दिन इंतजार करें, मैं इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखूंगा।”

यह विवाद एनसीईआरटी द्वारा हाल ही में जारी की गई कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब से जुड़ा है। पुस्तक के एक अध्याय में न्यायपालिका की भूमिका पर चर्चा करते हुए भ्रष्टाचार, लंबित मामलों की भारी संख्या और न्यायाधीशों की कमी जैसी चुनौतियों का जिक्र किया गया है। किताब के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में करीब 81 हजार, हाईकोर्टों में 62.40 लाख और जिला व अधीनस्थ अदालतों में 4.70 करोड़ मामले लंबित हैं। साथ ही, न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख है।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को अवगत कराया कि आठवीं कक्षा के छात्रों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने बार की ओर से इस मुद्दे को उठाया। अभिषेक मनु सिंघवी ने भी आपत्ति जताते हुए पूछा कि यदि भ्रष्टाचार पर बात हो रही है तो नौकरशाही, राजनीति और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों का जिक्र क्यों नहीं किया गया।

पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि पुस्तक की यह सामग्री संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ लगती है।

पुस्तक में पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के जुलाई 2025 के एक बयान का भी हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार या कदाचार जनता के विश्वास को प्रभावित करता है, लेकिन पारदर्शी और निर्णायक कार्रवाई से इसे बहाल किया जा सकता है।