प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजराइल यात्रा शुरू हो गई है, जिसके चलते देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस दौरे की कड़ी आलोचना की है।
कांग्रेस का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गाजा में सैन्य कार्रवाइयों और नीतियों की व्यापक निंदा हो रही है, ऐसे में पीएम मोदी का उनसे गले मिलना भारत की पारंपरिक विदेश नीति और नैतिक मूल्यों के विपरीत है। पार्टी ने इसे नैतिक कायरता करार दिया है और दावा किया है कि केंद्र सरकार ने फिलिस्तीनी नागरिकों के हितों को नजरअंदाज कर दिया है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पीएम मोदी इजराइली संसद (नेसेट) को संबोधित करते हुए गाजा में हजारों निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की मौत का जिक्र करेंगे तथा उनके लिए न्याय की मांग उठाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का इतिहास हमेशा सत्य, शांति और न्याय के पक्ष में खड़ा रहा है, इसलिए प्रधानमंत्री को इस मंच से दुनिया को यही संदेश देना चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे बेशर्मी से नेतन्याहू को गले लगा रहे हैं, जबकि गाजा को मलबे में तब्दील करने और वेस्ट बैंक में अवैध बस्तियों के विस्तार के गंभीर आरोप उनके खिलाफ हैं। रमेश ने भारत के पुराने रुख की याद दिलाई और कई ऐतिहासिक उदाहरण दिए,
- 20 मई 1960 को जवाहरलाल नेहरू का गाजा दौरा और वहां भारतीय यूएन टुकड़ी से मुलाकात।
- 29 नवंबर 1981 को फिलिस्तीन के सम्मान में जारी डाक टिकट।
- 18 नवंबर 1988 को भारत द्वारा फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता।
उनके अनुसार, वर्तमान सरकार की नीतियां पाखंडपूर्ण हैं और केवल दिखावे के लिए फिलिस्तीन समर्थन की बात करती है।
विपक्ष ने मंगलवार को भी सरकार पर हमला बोला था कि गाजा में नागरिकों पर लगातार हमलों के बावजूद यह दौरा भारत के पारंपरिक तटस्थ रुख और मानवाधिकारों की अनदेखी दर्शाता है।
दूसरी ओर, कूटनीतिक दृष्टि से यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह पीएम मोदी की इजराइल की दूसरी यात्रा है (पहली 2017 में), जिसका मुख्य उद्देश्य रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, कृषि, जल प्रबंधन और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पिछले नौ वर्षों में काफी गहरी हो चुकी है। सरकार इसे भारत के वैश्विक प्रभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए अहम बता रही है।