मध्य पूर्व में ईरान से जुड़े बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार लाल निशान पर खुला, जिसमें प्रमुख सूचकांक भारी बिकवाली के दबाव में आए।
बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1,100 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स लगभग 300 अंकों की कमी के साथ शुरू हुआ। सुबह के सत्र में कुछ हद तक सुधार दिखा, लेकिन सेंसेक्स अभी भी करीब 1,000 अंकों की कमजोरी के साथ 80,200 के आसपास कारोबार कर रहा था। प्री-मार्केट सत्र में भी सेंसेक्स में 2,700 से ज्यादा और निफ्टी में 500 अंकों की गिरावट के मजबूत संकेत मिले थे।
सेक्टरों में पोर्ट और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा। अडाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड, गुजरात पीपावाव पोर्ट और जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर 4-5 प्रतिशत तक टूट गए। लॉजिस्टिक्स कंपनियों में डिलीवरी के शेयर लगभग 10 प्रतिशत की भारी गिरावट दिखाई दी, जबकि ब्लू डार्ट एक्सप्रेस में 7 प्रतिशत की कमी आई। कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकोर) 6.8 प्रतिशत लुढ़ककर 52-सप्ताह के निचले स्तर 461.85 रुपये पर पहुंच गया। आईटी सेक्टर में भी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) जैसे प्रमुख शेयरों में 5 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ता संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल (चार साल के उच्च स्तर के करीब), सोने-चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों में तेजी और वैश्विक बाजारों की कमजोर धारणा ने निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से आयात-निर्भर भारत पर महंगाई और व्यापार संतुलन का दबाव बढ़ सकता है, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी रहने की आशंका है।
अमेरिकी बाजारों में भी पिछले शुक्रवार को गिरावट देखी गई थी और सोमवार को डाउ जोंस इंडेक्स 0.72 प्रतिशत या 342 अंकों की कमी के साथ 48,631 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। एसएंडपी 500 में 0.42 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.96 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।