सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और नए सहयोग के अवसर खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इससे पहले कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी भेंट की और इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी व्यक्त की। कार्नी ने दिल्ली पहुंचने पर पोस्ट में कहा था कि भारत और कनाडा ऊर्जा, प्रतिभा, नवाचार तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं, जो दोनों देशों के लिए समृद्धि का नया अध्याय शुरू करेगा।
सोमवार सुबह हैदराबाद हाउस में हुई बैठक के बाद दोनों नेताओं के प्रतिनिधिमंडलों के बीच विस्तृत वार्ता हुई। चर्चा में द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर फोकस रहा। प्रमुख मुद्दों में निवेश बढ़ाना, व्यापार वृद्धि, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग मजबूत करना और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को जल्द पूरा करने की दिशा में प्रगति शामिल रही। सूत्रों के अनुसार, खालिस्तानी अलगाववादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के मुद्दे पर भी बात हुई।
इस दौरे का एक खास उद्देश्य भारत-कनाडा के बीच संभावित 10 वर्षीय यूरेनियम आपूर्ति समझौते को आगे बढ़ाना है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग तीन अरब डॉलर है। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है और 2013 के परमाणु सहयोग समझौते के बाद से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करता आ रहा है।
वर्तमान में दोनों देशों के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार 21 अरब डॉलर से अधिक है। भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं, जबकि कनाडाई पेंशन फंड ने रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में भारी निवेश किया है। प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कनाडा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा।