इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को झकझोर दिया है। मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स छुट्टी के बाद दोबारा खुलने पर 4.8% की भारी गिरावट के साथ 5,946.06 पर बंद हुआ।
जापान का निक्केई 225 करीब 2.1% गिरकर 56,853.48 पर पहुंचा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 में 1.2% की कमी आई। चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.3% और हॉन्गकॉन्ग का हैंग सेंग 0.1% की मामूली गिरावट के साथ फ्लैट ट्रेडिंग के आसपास रहा। भारतीय शेयर बाजार होली के अवसर पर बंद रहा, लेकिन सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट देखी गई थी, और वैश्विक संकेतों से बुधवार को भी प्रभाव पड़ने की आशंका है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले और क्षेत्रीय आपूर्ति में व्यवधान है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में शुरुआती कारोबार में 13% तक की तेजी आई, जो $82.37 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जनवरी 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर। बाद में कुछ सुधार के साथ यह $77-78 के आसपास कारोबार कर रहा है। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 6-9% चढ़कर $71-72 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचा।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचा और होर्मुज स्ट्रेट में तेल परिवहन पूरी तरह प्रभावित हुआ, तो कीमतें $100 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इससे एयरलाइंस, मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ेगा। एशियाई एयरलाइंस जैसे कोरियन एयर (8.9% गिरावट) और जापान एयरलाइंस (5.2% गिरावट) के शेयरों में भारी बिकवाली हुई।
सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना 1-3% चढ़ा, जबकि अमेरिकी बाजारों में शुरुआती गिरावट के बाद तेल और रक्षा कंपनियों के शेयरों से कुछ रिकवरी हुई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक तनाव से वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और आर्थिक सुधार पर असर पड़ सकता है।