मध्य पूर्व में जारी तनाव अब हिंद महासागर तक फैल गया है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमले जारी हैं, जबकि ईरान भी जवाबी कार्रवाई में इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इस बीच, हिंद महासागर में एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस डेना’ को टॉरपीडो से हमला कर डुबो दिया। इस हमले में कम से कम 87 नाविकों की मौत हो गई है। यह घटना श्रीलंका के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई।
यह युद्धपोत हाल ही में भारत में हुए बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मिलन-2026 में हिस्सा लेने के बाद ईरान लौट रहा था। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि की है, इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद टॉरपीडो से दुश्मन जहाज डुबोने की पहली बड़ी कार्रवाई बताया है।
इस घटना से भारत में भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि मध्य पूर्व संकट से देश की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि विश्व अस्थिरता के दौर में प्रवेश कर चुका है और समुद्री क्षेत्र में बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि भारत की तेल आपूर्ति खतरे में है, क्योंकि 40 प्रतिशत से अधिक तेल आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। एलपीजी और एलएनजी की स्थिति और भी गंभीर है। उन्होंने कहा, “संघर्ष अब हमारे घर तक पहुंच गया है। हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत डुबो दिया गया, लेकिन प्रधानमंत्री ने कोई टिप्पणी नहीं की। ऐसे समय में मजबूत और स्थिर नेतृत्व की जरूरत है, लेकिन हमारे पास एक समझौतावादी प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने देश की सामरिक स्वायत्तता को समर्पित कर दिया है।”
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और ऊर्जा सुरक्षा तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है। मध्य पूर्व का यह संकट वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर सीधा पड़ने की आशंका है।