नीतीश कुमार MLC से इस्तीफा, नितिन नवीन ने भी MLA पद छोड़ा

बिहार की राजनीति में आज एक महत्वपूर्ण संवैधानिक कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद (MLC) की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह कदम 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में उनकी निर्विरोध जीत के बाद लिया गया है।

विधान परिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह ने इसकी पुष्टि की। JDU के एमएलसी संजय गांधी ने मुख्यमंत्री की ओर से इस्तीफा पत्र सौंपा। अब नीतीश कुमार अप्रैल में राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेने की तैयारी में हैं।

कैबिनेट मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी इस्तीफे की जानकारी दी और कहा कि यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। संविधान के नियमों के अनुसार, राज्यसभा सदस्य चुने जाने के 14 दिनों के अंदर विधानमंडल की सदस्यता छोड़नी अनिवार्य है।

नितिन नवीन ने भी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया

इसी दिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (नितिन नबीन) ने भी बिहार विधानसभा की अपनी सदस्यता (बांकीपुर सीट से MLA) से इस्तीफा सौंप दिया। वे भी 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने गए थे। संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें भी आज तक विधायक पद छोड़ना था। नितिन नवीन के इस्तीफे से बिहार विधानसभा में एक सीट खाली हो गई है।

कानूनी और संवैधानिक पहलू

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार, कोई व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं रह सकता। इसलिए दोनों नेताओं को अपने पुराने पदों से इस्तीफा देना पड़ा। बिहार विधानसभा और विधान परिषद दोनों 29 मार्च तक अवकाश पर थे, जिसके कारण आज प्रक्रिया पूरी हुई।

नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर अभी बने रह सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत कोई भी व्यक्ति बिना सदन का सदस्य हुए भी छह महीने तक मंत्री या मुख्यमंत्री पद पर रह सकता है। हालांकि, उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की अटकलें राजनीतिक गलियारों में जोरों पर हैं।