महाराष्ट्र के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की रिपोर्ट ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाडकी बहिन’ योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस योजना में करीब 3,541 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं।
कैग ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने विधायी मंजूरी के बिना ही आवंटित बजट से 3,541 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च कर दिए। विभाग इस खर्च को लेकर कोई ठोस कारण या स्पष्टीकरण भी नहीं दे सका।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि योजना के कारण राज्य का महिला कल्याण बजट 261.78 करोड़ रुपये से 120 गुना से भी ज्यादा बढ़कर 33,554 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कैग ने चिंता जताई कि इतने बड़े वित्तीय बोझ के कारण राज्य का अधिकतर खर्च अब विकास कार्यों के बजाय लोक-लुभावन योजनाओं की तरफ मुड़ गया है।
कैग के मुताबिक यह प्रवृत्ति राज्य की अर्थव्यवस्था और दीर्घकालिक विकास के लिए ठीक नहीं है। बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में निवेश प्रभावित हो सकता है।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि भविष्य में इस तरह की योजनाओं के लिए पहले विधायी मंजूरी ली जाए और खर्च की निगरानी के लिए सख्त तंत्र बनाया जाए।
‘लाडकी बहिन’ योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। लेकिन कैग की इस रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने सरकार पर वित्तीय अनुशासन तोड़ने का आरोप लगाया है। सरकार की तरफ से अभी इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।