भोपाल के रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई ने व्यापारियों को सड़क पर उतार दिया है। सोमवार को हुई कार्रवाई के दौरान कई जगह तनाव बढ़ा और पुलिस व व्यापारियों के बीच हाथापाई की स्थिति बनी। मंगलवार को व्यापारियों ने थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार से सद्बुद्धि की अपील की।
नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे अवैध कारोबार पर सख्ती बढ़ाई है। शहरभर में हजारों नोटिस जारी होने के बाद सोमवार को कई टीमों ने पुलिस की मदद से कोलार, अरेरा कॉलोनी, गौतम नगर, रचना नगर और आसपास के इलाकों में कार्रवाई की। करीब सौ से अधिक प्रतिष्ठान बंद कराए गए। कुछ जगह व्यापारियों ने खुद शटर गिरा दिए, जबकि कुछ प्रतिष्ठानों को बलपूर्वक सील किया गया।
कार्रवाई के दौरान अरेरा कॉलोनी समेत कुछ क्षेत्रों में नाराजगी फूट पड़ी। व्यापारियों ने निगम कर्मियों से बहस की और कुछ लोगों ने सड़क जाम करने की कोशिश की। पुलिस ने स्थिति संभाली। कुछ रिपोर्टों के अनुसार बैरिकेड हटाते समय धक्का-मुक्की हुई और कुछ कारोबारी गिर भी पड़े। कई थानों का अतिरिक्त बल तैनात कर शांति बनाए रखी गई।
मंगलवार सुबह टीटी नगर क्षेत्र में सैकड़ों व्यापारियों ने इकट्ठा होकर विरोध जताया। उन्होंने थालियां, बर्तन, शंख और डमरू बजाकर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स और व्यापारी संगठनों के नेताओं ने कहा कि पिछले कई शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का असर नहीं हुआ, इसलिए अब प्रतीकात्मक तरीके से आवाज उठाई जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने सीएम निवास की ओर कूच कर ज्ञापन सौंपने की योजना भी बनाई।
व्यापारी संगठनों का आरोप है कि मास्टर प्लान लंबे समय से अपडेट न होने के कारण यह संकट पैदा हुआ है। वे मिश्रित भू-उपयोग नीति लागू करने और कार्रवाई रोकने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक सीलिंग से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।
नगर निगम का पक्ष है कि अदालती आदेशों का पालन जरूरी है और स्वेच्छा से बंद करने वालों का पंचनामा बनाया जा रहा है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और 15 सितंबर को अगली सुनवाई निर्धारित है।