सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी देशभर की सभी FIR रद्द कर दीं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच की घटनाओं को लेकर कोई नई FIR भी दर्ज नहीं की जाएगी।
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पूर्ण न्याय करने के लिए यह कदम उठाया। केंद्र सरकार (दिल्ली पुलिस) के साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने भी इन FIR को रद्द करने की अर्जी दी थी। कोर्ट ने आदेश का दायरा पूरे देश में बढ़ाते हुए निर्देश दिया कि अन्य राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में भी इन्हीं प्रदर्शनों से जुड़ी कोई FIR हो तो उन पर आगे की कार्रवाई बंद कर दी जाए।
हालांकि, एक अपवाद रखा गया। दिल्ली पुलिस को 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने या जांच जारी रखने की अनुमति मिली, जिनके गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड बताए गए थे और जो जंतर-मंतर प्रदर्शन में मौजूद थे।
CJP का फैसला
अदालत के इस आदेश और सरकार के आश्वासन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च वापस ले लिया। संगठन के प्रतिनिधि ने कोर्ट में बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में मार्च का आह्वान वापस लेना उचित है।