शिक्षक दिवस के मौके पर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले 48 स्कूल शिक्षकों से प्रधानमंत्री आवास पर मुलाकात की। इस विशेष कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, बच्चों की बदलती आदतें, स्क्रीन टाइम, खेलकूद और स्कूलों में नियमों जैसे कई विषयों पर शिक्षकों से बातचीत की तथा उनके सुझाव भी मांगे। इस चर्चा का वीडियो प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा किया गया।
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने एक शिक्षिका से अपनी सार्वजनिक बोलने की कला को लेकर सलाह मांगी। उन्होंने पूछा कि अगर वे उनके विद्यार्थी होते और कुशल वक्ता बनना चाहते तो वे क्या सुझाव देतीं। शिक्षिका ने जवाब दिया कि सबसे जरूरी आत्मविश्वास है, जो निरंतर अभ्यास से विकसित होता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री का व्यक्तित्व देखकर वे खुद थोड़ी घबरा गई थीं।
बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर प्रधानमंत्री ने चिंता जताई और कहा कि यह अब एक तरह की लत का रूप ले रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि वास्तविक मैदानी खेलों में रुचि पैदा करने से बच्चों को इस आदत से बाहर निकालने में मदद मिल सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मतलब वीडियो गेम नहीं, बल्कि मैदान में खेले जाने वाले खेलों से है।
स्कूल और कॉलेजों में ड्रेस कोड समेत विभिन्न नियमों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़े शहरों या विश्वविद्यालयों में कभी-कभी पर्याप्त जागरूकता और स्पष्टीकरण के बिना नियम लागू कर दिए जाते हैं। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे ऐसे फैसलों के बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव और उनके मन में पैदा होने वाली आशंकाओं के प्रति सतर्क रहें तथा व्यवहार में किसी बदलाव पर भी नजर रखें।
एक शिक्षिका से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अब महिलाएं स्वयं जांच के लिए आगे आने लगी हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं था। उन्होंने एक दिन में सर्वाधिक स्क्रीनिंग के विश्व रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया।