मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बिहार की यादव बहुल सीटों पर रणविजय महारथी की भूमिका में आ गए हैं। बिहार में राजद और कांग्रेस द्वारा तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के साथ भाजपा अपने चुनाव प्रचार में डॉ. मोहन यादव का भरपूर उपयोग करने जा रही है। डॉ. यादव को उन सीटों पर ज्यादा सक्रिय रखा जाएगा जहां पर यादव समाज के मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। अब तक डॉ. मोहन यादव यहां के पांच विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा और एनडीए गठबंधन के उम्मीदवारों के समर्थन में चुनावी सभा कर चुके हैं। डॉ. मोहन यादव का उपयोग बिहार के चुनाव में करने की रणनीति भाजपा ने पूर्व में ही बना ली थी, इसके चलते ही बिहार में यादव समाज के बीच वे करीब पौने दो साल से सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद ही उनका पहला बिहार दौरा श्रीकृष्ण चेतना विचार मंच की बैठक में शामिल होने के साथ हुआ। इस विचार मंच का पिछले महीने भी एक कार्यक्रम हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष रूप से मौजूद थे। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के विचारों का जन समरस सांस्कृतिक सम्मेलन में भी वे शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री ने यहां अखिल भारतीय यादव महासभा अहीर की बिहार इकाई द्वारा आयोजित नियमित समाज सुधार श्रृंखला में भी सहभागिता की थी। वहीं हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कुम्हरार, बिक्रम, बगहा, सिकटा और सहरसा विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा और एनडीए प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार कर चुके हैं। इन सभाओं में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की विकास योजनाओं और गरीब वर्ग से उठकर शीर्ष पद तक पहुंचने की अपनी यात्रा का उल्लेख किया। वे लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि भाजपा ऐसे कार्यकतार्ओं को आगे बढ़ाती है जिनका राजनीति में पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं रही। अब आगामी चरणों के चुनाव प्रचार में भाजपा डॉ. मोहन यादव के प्रचार कार्यक्रमों को और विस्तार दे सकती है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में, जहां यादव मतदाता चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकते है, उनके कार्यक्रमों पर विचार चल रहा है। हालांकि, किन जिलों में सभाएं होंगी, यह अभी तय होना है, अब तक उनके 31 अक्टूबर तक के कार्यक्रम तय हो चुके हैं। बिहार में 60 से ज्यादा सीटें ऐसी है जहां पर यादव समाज के लोग निर्णायक भूमिका में रहते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव के प्रभाव वाले वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मोहन यादव को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर रही है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ यादव समुदाय से उनके आने के कारण पार्टी उन्हें बिहार के प्रचार अभियान में एक प्रभावी चेहरा मान रही है।