छठ महापर्व के दौरान बिहार में कुल 83 लोग विभिन्न हादसों में जान गंवाने वाले शिकार बने। केवल पटना में ही डूबने से नौ व्यक्तियों की मृत्यु हुई। इनमें से अधिकांश मौतें छठ घाट निर्माण के समय पैर फिसलने, स्नान करते हुए या अर्घ्य अर्पित करने के दौरान गहरे जल में चले जाने से हुईं। क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण बिहार से 34, कोसी-सीमांचल एवं पूर्वी बिहार से 30 तथा उत्तर बिहार से 19 लोग मारे गए।
पटना से लगे मोकामा के मरांची इलाके में बादपुर गंगा घाट पर मंगलवार सुबह लगभग 6:30 बजे स्नान के दौरान 21 वर्षीय रॉकी पासवान डूबकर मृत्यु को प्राप्त हो गए। सूचना मिलते ही उनकी बहन सपना कुमारी को गहरा सदमा लगा और उन्होंने भी दम तोड़ दिया, जिससे परिवार में कोहराम मच गया। बादपुर के निवासी चूहा पासवान के बेटे रॉकी गंगा में नहा रहे थे कि अचानक गहरे पानी में बह गए। स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ दल ने काफी प्रयास के बाद उनका शव बाहर निकाला। सपना को घटना की खबर लगी तो उनकी हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें मरांची के निजी चिकित्सालय ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। रॉकी ने हाल ही में होमगार्ड की शारीरिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी और घर में उत्साह का वातावरण था।
पटना जिले में गंगा स्नान के अलग-अलग स्थलों पर 15 व्यक्ति डूबे, जिनमें नौ की मौत हुई। मोकामा में तीन, बाढ़-बिहटा तथा खगौल में दो-दो जानें गईं। मनेर में दो और अथमलगोला में एक युवक की खोज अभी चल रही है। बाढ़ में तीन, खगौल में एक तथा गोपालपुर तालाब में डूबे एक युवक को निकालकर एक घंटे तक सीपीआर देकर जीवित बचाया गया। वैशाली के राघोपुर व महुआ में घाट बनाने के बाद नहाते समय दो किशोर, महनार में एक व्रती, गोपालगंज के भोरे थाना अंतर्गत दुबे जिगना गांव में दो, औरंगाबाद में दो, भोजपुर में एक, बेगूसराय में एक, नावानगर में एक तथा रोहतास में एक की मृत्यु दर्ज की गई। छपरा में भी डूबने से एक व्यक्ति की जान चली गई। बाढ़ के जमुनीचक की 60 वर्षीय व्रती मुन्नी देवी पूजा समाप्त कर घाट से लौटते समय हृदयाघात से बेहोश हो गईं। परिजन उन्हें अनुमंडल अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित किया। खबर सुनते ही बेटा और अन्य रिश्तेदार फूट-फूटकर रोने लगे।