किसान कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
विदिशा: मध्य प्रदेश में फसल खरीद नीति को लेकर सियासी तापमान चढ़ता जा रहा है। प्रदेश किसान कांग्रेस के निर्देश पर जिला किसान कांग्रेस ने विवेकानंद चौराहे पर एकत्रित होकर स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कलेक्ट्रेट में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष विनीत दांगी के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकतार्ओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन जिलाधीश को सौंपा। ज्ञापन में राज्य सरकार द्वारा विकेंद्रीकृत उपार्जन प्रणाली से हटकर सीधे भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से फसल खरीदने के फैसले की कड़ी निंदा की गई है। यह विरोध उस पत्र के बाद शुरू हुआ है, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी को लिखकर डीसीपी से बाहर निकलने का आग्रह किया था। सरकार का तर्क है कि राज्य पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि इससे किसानों की मुश्किलें दोगुनी हो जाएंगी। जिला अध्यक्ष विनीत दांगी ने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि एफसीआई केंद्रों पर 30-40% फसल तक अस्वीकार हो जाती है। फिर किसान क्या करेगा, व्यापारियों के रहम पर औने-पौने दामों में फसल बेचने को मजबूर हो जाएगा। विदिशा जैसे जिले में जहां 2 लाख से अधिक किसान परिवार धान और गेहूं पर निर्भर हैं, यह फैसला उनकी जीविका पर सीधा हमला है। श्री दांगी ने कहा कि भाजपा ने 2023 विधानसभा चुनाव में ‘मोदी की गारंटी’ के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए थे। अब सत्ता में आकर पीठ दिखा रही है। यह धोखा है, विश्वासघात है। हम चुप नहीं बैठेंगे।
राज्य सरकार अपना निर्णय रद्द करे और फसल खरीद की जिम्मेदारी राज्य स्तर पर ही निभाए। चुनावी वादा पूरा करो: भाजपा के 2023 घोषणा- पत्र मोदी की गारंटी के अनुसार धान 3,100 और गेहूं 2,700 प्रति क्विंटल की दर से खरीद सुनिश्चित की जाए। आंदोलन की चेतावनी विनीत दांगी ने चेतावनी दी कि यदि 7 दिनों के अंदर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो जिले के सभी ब्लॉकों में सामूहिक ज्ञापन अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद तहसील और जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन की योजना है। कांग्रेस नेता सुजीत देवलिया ने कहा, यह सिर्फ विदिशा की नहीं, पूरे मध्य प्रदेश के किसानों की लड़ाई है।