काल भैरव जयंती: भगवान शिव के उग्र रूप की पूजा का पावन पर्व

हिंदू धर्म में काल भैरव जयंती का विशेष महत्व है, यह पर्व भगवान शिव के भयावह और रक्षक रूप काल भैरव को समर्पित है। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार भक्तों को भय, पाप और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाने का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष काल भैरव जयंती 12 नवंबर को पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है।

काल भैरव को शिव का पांचवां अवतार कहा जाता है, जो समय के स्वामी और न्याय के देवता हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवाद के दौरान शिव ने अपने नाखून से भैरव को उत्पन्न किया, जो ब्रह्मा के पांचवें सिर को काटकर अहंकार का नाश करने वाले बने। कुत्ते को उनका वाहन माना जाता है, जो निष्ठा और सतर्कता का प्रतीक है। भक्त इस दिन काल भैरव की पूजा से रक्षा, समृद्धि और दुश्मनों पर विजय प्राप्त करने की कामना करते हैं।

पूजा विधि और परंपराएं

जयंती के दिन भक्त सुबह स्नान कर काले वस्त्र धारण करते हैं। मंदिरों में काल भैरव की मूर्ति को काले तिल, सरसों का तेल, उड़द की दाल और फूलों से सजाया जाता है। विशेष रूप से काशी (वाराणसी) के काल भैरव मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है, जहां श्रद्धालु मदिरा अर्पित करते हैं – यह एक अनोखी परंपरा है जो भैरव की उग्रता को शांत करने का प्रतीक है। शाम को दीपदान, भजन-कीर्तन और व्रत रखकर पूजा की जाती है। कई जगहों पर कुत्तों को भोजन कराने की रिवाज भी प्रचलित है, क्योंकि वे भैरव के प्रिय माने जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा करने से काल सर्प दोष, शत्रु भय और आकस्मिक संकटों से छुटकारा मिलता है। ज्योतिष शास्त्र में काल भैरव को राहु के अधिपति देवता के रूप में पूजा जाता है, जो ग्रहों की पीड़ा को दूर करते हैं।

देशभर में उत्सव

वाराणसी, उज्जैन और दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन हो रहे हैं। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में भैरव की आरती और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है। कोविड के बाद पहली बार पूर्ण क्षमता से मेलों का आयोजन हो रहा है, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रवचन भक्तों को आकर्षित कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर #KaalBhairavJayanti हैशटैग के साथ लाखों पोस्ट वायरल हो रही हैं, जहां युवा पीढ़ी भी इस पर्व को डिजिटल रूप से मना रही है।

काल भैरव जयंती न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि जीवन में संतुलन और न्याय की शिक्षा देता है। भक्तों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा से भैरव की कृपा प्राप्त कर जीवन के कष्ट दूर किए जा सकते हैं। इस पावन अवसर पर सभी को शुभकामनाएं!