बदरीनाथ हाईवे पर खतरा बढ़ा: भारी बारिश से 32 नए भूस्खलन जोन बने, कुल 77 संवेदनशील क्षेत्र

ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) पर इस साल भारी बारिश ने 32 नए भूस्खलन क्षेत्र पैदा कर दिए हैं। अब इस हाईवे पर पहले से चिह्नित 45 पुराने जोनों के अलावा कुल 77 संवेदनशील भूस्खलन जोन हो गए हैं। कई स्थानों पर लगातार भूधंसाव और पहाड़ी का दरकना हाईवे को बेहद जोखिमपूर्ण बना रहा है।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के विशेषज्ञों की टीम ने इन 32 नए जोनों का मौके पर निरीक्षण पूरा कर लिया है और अब इनके स्थायी उपचार के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। यह डीपीआर जल्द ही केंद्र सरकार को भेजी जाएगी ताकि स्थायी समाधान का काम शुरू हो सके।

ऑलवेदर चारधाम सड़क परियोजना के तहत 2016 में चौड़ीकरण कार्य शुरू होने के बाद बड़े पैमाने पर पहाड़ कटान की वजह से अनेक नए भूस्खलन क्षेत्र बने थे। पहले चरण में 22 पुराने जोनों का सॉइल नेलिंग और रॉक एंकरिंग तकनीक से स्थायी इलाज चल रहा है, जिसमें 70 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। दूसरे चरण के 24 जोनों के लिए डीपीआर को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।

सबसे अधिक जोखिम वाला इलाका सम्राट होटल से नरकोटा तक लगभग एक किलोमीटर लंबा हिस्सा है, जहां पहाड़ निरंतर दरक रहा है और आए दिन यातायात ठप हो जाता है। तोताघाटी के संवेदनशील भाग में तीखे मोड़ों को खत्म कर दिया गया है और सुरक्षा दीवार का निर्माण तेजी से चल रहा है।

नए भूस्खलन जोन वाले प्रमुख स्थान हैं—स्वीत पुल, सम्राट होटल क्षेत्र, फरासू, ब्रह्मपुरी, तिमलापानी, शिवपुरी, कौड़ियाला, महादेव चट्टी, सकनीधार, भीत गांव, देवप्रयाग संगम, मुल्यागांव, मलेथा, कीर्तिनगर के पास और उफ्ल्टा आदि।

राष्ट्रीय राजमार्ग खंड (श्रीनगर गढ़वाल) के कार्यपालक अभियंता राजवीर सिंह चौहान ने बताया कि सभी नए जोनों की डीपीआर शीघ्र ही पूरी कर ली जाएगी और अगले यात्रा सीजन (2026) से पहले हाईवे की स्थिति में काफी सुधार हो जाएगा।