तिरंगे के अपमान के बीच ट्रेड डील पर PM मोदी-कार्नी ने शुरू की बातचीत

कनाडा के ओटावा में रविवार को खालिस्तानी अलगाववादियों ने एक अनौपचारिक ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ के दौरान भारतीय संप्रभुता पर गंभीर हमला किया। आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) द्वारा आयोजित इस गैर-कानूनी वोटिंग में 53,000 से अधिक समर्थकों ने भाग लेने का दावा किया। इस दौरान खालिस्तानी समर्थकों ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ का अपमान किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भारतीय अधिकारियों के खिलाफ ‘मार डालो’ जैसे हिंसा भड़काने वाले नारे लगाए।

भारत सरकार ने इस आयोजन को अवैध बताते हुए कनाडा की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ अलगाववाद फैलाने के लिए किए जाने की कड़ी निंदा की है। SFJ ने कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी की पीएम मोदी से मुलाकात पर सवाल उठाते हुए इसे भारत-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कमजोरी बताया।

इसके विपरीत, एक तरफ अलगाववादी भारत विरोधी गतिविधियाँ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। दक्षिण अफ्रीका में G-20 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की द्विपक्षीय मुलाकात में ट्रेड डील के लिए फिर से बातचीत शुरू करने का ऐलान किया गया है। कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को 50 बिलियन डॉलर (₹4.45 लाख करोड़) तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें क्रिटिकल मिनरल्स, प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहली बार नहीं है जब कनाडा में भारतीय प्रतीकों का अपमान हुआ हो; मार्च 2024 में कॅलगरी और अप्रैल 2025 में सरे में भी तिरंगे का अपमान किया जा चुका है। भारत सरकार लगातार इन अलगाववादी गतिविधियों पर कनाडा सरकार के रुख को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करती रही है।