श्रीनगर की डल झील की तर्ज पर अब भोपाल के बड़े तालाब में पर्यटक शिकारे (लकड़ी की विशेष नाव) की सवारी का लुत्फ उठा सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज बोट क्लब पर आयोजित एक कार्यक्रम में 20 नए शिकारों को हरी झंडी दिखाकर इनका शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने स्वयं शिकारे में बैठकर सवारी भी की।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
20 शिकारे उतरे मैदान में
नगर निगम ने इससे पहले 13 जून 2024 को प्रायोगिक तौर पर केवल एक शिकारा चलाया था। इस सफल प्रयोग के बाद अब एक साथ 20 शिकारे बड़ा तालाब में उतारे गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा लगभग 10 महीने पहले, 12 सितंबर को, क्रूज और मोटर बोट के संचालन पर रोक लगाए जाने के बाद से केवल सामान्य नावें ही चलाई जा रही थीं।
किराया और समय-सारणी
शिकारे के संचालन का समय सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक निर्धारित किया गया है। प्रति व्यक्ति किराया करीब 150 रुपए हो सकता है, हालांकि अंतिम किराया अभी तय नहीं हुआ है। शिकारे 2.3 किलोमीटर का एक राउंड लगाएंगे और बीच में स्थित टापू के करीब भी पहुंचेंगे, जिससे पर्यटकों को बड़ा तालाब का नया अनुभव मिलेगा।
क्या होता है शिकारा?
शिकारा कश्मीर की डल झील और अन्य झीलों में उपयोग की जाने वाली एक विशेष प्रकार की लकड़ी की नाव है। ये अलग-अलग आकार के होते हैं, लेकिन सामान्य शिकारा लगभग आधा दर्जन लोगों को बैठा सकता है। इसे आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और चालक नाव को पीछे की तरफ से चलाता है।इनका उपयोग लोगों के परिवहन और डल झील में पर्यटकों की सैर के लिए किया जाता है। भोपाल में भी पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नया अनुभव देने के लिए यह पहल की गई है।
NGT के आदेश और रोक
NGT ने लगभग दो साल पहले, भोज वेटलैंड (बड़ा तालाब) सहित प्रदेश की सभी वाटर बॉडीज में क्रूज और मोटर बोट के संचालन को अवैध ठहराते हुए रोक लगा दी थी।
NGT ने कहा था कि डीजल इंजन से निकलने वाला उत्सर्जन (सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड) पानी को एसिडिक बना देता है, जो इंसानों और जलीय जीवों के लिए कैंसरकारी और खतरनाक है।इस आदेश के बाद से ही भोपाल के बड़ा तालाब में लोकप्रिय ‘लेक प्रिंसेज’ क्रूज और ‘जलपरी’ मोटरबोट का संचालन पूरी तरह बंद हो गया था।
क्रूज और मोटर बोट के बंद होने से बोट क्लब पर आने वाले पर्यटक निराश थे। अब शिकारे शुरू होने से वे एक नए और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से बड़ा तालाब के नज़ारों का लुत्फ़ उठा सकेंगे।