पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा शुरू, मोदी फिर मनाएंगे युद्ध रोकने के लिए

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज से दो दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंच गए हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम उन्हें निजी डिनर देंगे, जबकि कल दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की औपचारिक वार्ता होगी। पुतिन भारतीय कारोबारी जगत के प्रमुख नेताओं को भी संबोधित करेंगे।

लेकिन इन सभी कार्यक्रमों से ऊपर सबसे ज्यादा उत्सुकता इस सवाल को लेकर है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर पुतिन को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए राजी कर पाएंगे।

पश्चिमी देश खुलेआम कह रहे हैं कि पुतिन मोदी की बात सुनते हैं और दुनिया में सिर्फ भारत ही रूस पर प्रभावी दबाव डाल सकता है। पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने हाल ही में कहा कि यह युद्ध अब किसी के हित में नहीं रहा। उम्मीद है मोदी पुतिन से साफ-साफ कहेंगे कि अब बहुत हो चुका। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के राजदूतों ने तो एक भारतीय अखबार में संयुक्त लेख लिखकर रूस की कड़ी निंदा की और परोक्ष रूप से भारत से मध्यस्थता की अपील की। भारत ने इस लेख को कूटनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन करार दिया है।

पश्चिमी देशों का एक ही राग है—भारत रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करे, क्योंकि इससे पुतिन को युद्ध चलाने के लिए धन मिल रहा है। भारत ने अब तक अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इन दबावों को नजरअंदाज किया है, लेकिन इस यात्रा में यह मुद्दा फिर से जोर पकड़ सकता है।

साल 2022 में समरकंद की एससीओ बैठक में मोदी ने पुतिन से पहली बार सार्वजनिक रूप से कहा था—“यह युग युद्ध का नहीं है।” पिछले साल मॉस्को जाने पर भी उन्होंने यही बात दोहराई कि समाधान बातचीत से ही निकलेगा, हथियारों से नहीं। युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की अब तक 16 मुलाकातें और बातचीत हो चुकी हैं, जिनमें से अकेले इस साल पांच बार संपर्क हुआ है।

इस यात्रा में भी प्रधानमंत्री मोदी का मूल संदेश वही रहेगा—युद्ध रोकें, शांति वार्ता शुरू करें। भारत न रूस के पक्ष में खड़ा है, न अमेरिका-यूरोप के पक्ष में; वह सिर्फ शांति के पक्ष में है।

पहले भी भारत ने परदे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है—जापोरिज्ज्या परमाणु संयंत्र को सुरक्षित रखने में मदद की, काला सागर अनाज समझौते को बचाने में अहम योगदान दिया। अब वैश्विक समुदाय को उम्मीद है कि मोदी-पुतिन की यह मुलाकात कम से कम युद्ध को और खींचने से रोकने में सफल रहेगी।