भारतीय नौसेना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 दिसंबर को सभी नौसैनिकों को हार्दिक बधाई दी और देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा में उनकी अतुलनीय भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारतीय नौसेना साहस, संकल्प और व्यावसायिकता की मिसाल है, जो न केवल तटों की सुरक्षा करती है बल्कि समुद्री हितों को भी मजबूती प्रदान करती है। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में नौसेना ने आत्मनिर्भर भारत अभियान को सशक्त करते हुए स्वदेशी हथियारों, प्लेटफॉर्मों और आधुनिक तकनीक के निर्माण पर विशेष बल दिया है, जिससे हमारी समुद्री शक्ति कई गुना बढ़ी है।
उन्होंने पिछले साल दीपावली के दौरान स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर नौसैनिकों के साथ बिताए यादगार पलों को भी स्मरण किया और कहा कि वह अनुभव उनके लिए सदैव खास रहेगा। अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा, आर्थिक हितों की रक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखने में भारतीय नौसेना का योगदान अनुपम है। भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का लक्ष्य हमेशा विश्व कल्याण और स्थिरता रहा है।
नौसेना दिवस से एक दिन पहले केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के शंगुमुघम बीच पर भारतीय नौसेना ने अपनी आधुनिक शक्ति का शानदार प्रदर्शन किया। इस भव्य ऑपरेशनल डेमोंस्ट्रेशन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वयं देखा। इसमें देश का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, नई फ्रिगेट आईएनएस उदयगिरि, एक पनडुब्बी, चार तेज़ गश्ती पोत और कुल 32 विमान-हेलीकॉप्टरों ने हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन नौसेना की बहु-आयामी युद्ध क्षमता, लंबी दूरी तक पहुंच और भविष्य के खतरों से निपटने की तैयारियों का जीवंत प्रमाण था।
हर साल 4 दिसंबर को मनाया जाने वाला नौसेना दिवस 1971 के भारत-पाक युद्ध में ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ की स्मृति में समर्पित है। उस सफल अभियान में भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह पर धावा बोलकर पाकिस्तानी नौसेना के प्रमुख युद्धपोतों जिसमें पीएनएस खैबर भी शामिल था, को नेस्तनाबूद कर दिया था और युद्ध का रुख पूरी तरह बदल दिया था। आज पूरा देश नौसेना के जवानों के साहस, समर्पण और देशभक्ति को नमन कर रहा है।