‘स्वच्छता के सिरमौर’ में लीकेज ने ली 8 जानें; अफसरों की लापरवाही से मौत का ‘जहर’ बना नर्मदा जल

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इस समय मातम और दहशत के साये में है। क्षेत्र में दूषित पानी (नर्मदा जल) के सेवन से पिछले पांच दिनों में 8 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि प्रशासन ने अब तक केवल 3 मौतों की ही आधिकारिक पुष्टि की है। इस त्रासदी ने नगर निगम और पीएचई (PHE) विभाग की उन गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है, जिन्हें समय रहते सुधारा जा सकता था।

‘मौत का लीकेज’

घटना की पड़ताल में पता चला कि यह पूरा संक्रमण एक सार्वजनिक शौचालय (सुविधाघर) के नीचे दबी मुख्य जल लाइन में हुए लीकेज के कारण फैला। शौचालय की गंदगी पेयजल लाइन में मिल रही थी, जिसे लोग ‘अमृत’ समझकर पीते रहे।

हैरानी की बात यह है कि इस क्षेत्र में नई पाइपलाइन डालने के लिए ₹2.40 करोड़ का टेंडर अगस्त में ही हो चुका था, लेकिन अधिकारियों ने चार महीनों तक टेंडर की फाइल ही नहीं खोली। जब लाशें गिरने लगीं, तब जाकर आनन-फानन में कागजी कार्रवाई पूरी की गई।

अस्पतालों की स्थिति: 111 लोग अभी भी भर्ती

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में अब तक 150 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों का विवरण इस प्रकार है:

  • वर्मा हॉस्पिटल: 30 मरीज
  • ईएसआईसी (ESIC): 11 मरीज
  • अरबिंदो हॉस्पिटल: 6 मरीज (3 आईसीयू में)
  • एमवाईएच (MYH): 5 मरीजहालात की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने अरबिंदो अस्पताल में 100 बेड का विशेष यूनिट तैयार करवाया है।

जिम्मेदारों पर गिरी गाज

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने प्राथमिक कार्रवाई की है:

  1. शालिग्राम शितोले (जोनल अधिकारी): निलंबित।
  2. योगेश जोशी (प्रभारी सहायक अभियंता): निलंबित।
  3. शुभम श्रीवास्तव (प्रभारी डिप्टी इंजीनियर): सेवा समाप्त।
  4. जांच समिति: आईएएस नवजीवन पंवार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी गठित।

सरकार की राहत घोषणाएं

  • मुआवजा: मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री ने 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है।
  • निशुल्क इलाज: प्रभावित क्षेत्र के मरीजों के इलाज का पूरा खर्च शासन वहन करेगा। यदि किसी ने पैसे जमा किए हैं, तो उन्हें रिफंड दिया जाएगा।
  • स्वच्छ जलापूर्ति: क्षेत्र में 50 टैंकरों के माध्यम से पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। हेल्पलाइन नंबर 7440440511 जारी किया गया है।

एक नज़र में ‘भागीरथपुरा रेस्क्यू’

गतिविधिविवरण
कुल सर्वे2703 घर (12,000 लोग)
मौके पर उपचार1146 मरीज
स्वास्थ्य दल14 डॉक्टर, 24 पैरामेडिकल स्टाफ
दवा वितरणक्लोरीन, जिंक टैबलेट और ओआरएस

यह घटना केवल एक प्राकृतिक बीमारी नहीं, बल्कि सिस्टम की सुस्ती और टेंडर फाइलों में दबे भ्रष्टाचार का नतीजा है। जहाँ साल भर की दवाइयां महज 4 दिन में बिक गईं, वहां अब भी कई घरों में बदबूदार पानी की समस्या बनी हुई है। विजय नगर और राउ जैसे इलाकों में भी मेट्रो कार्य और ड्रेनेज के कारण हालात बिगड़ने का डर है।