उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। चुनाव आयोग द्वारा 6 जनवरी 2026 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में राज्य से लगभग 2.89 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 18.7 प्रतिशत है। इस बड़े पैमाने पर छंटनी के बाद अब प्रदेश में मतदाताओं की संख्या घटकर 12.55 करोड़ हो गई है।
चुनाव आयोग का कहना है कि नाम हटाने के पीछे मुख्य वजहें मृत मतदाताओं की पहचान, स्थानांतरण या पलायन, लंबे समय से अनुपस्थित रहने वाले व्यक्ति और डुप्लीकेट पंजीकरण जैसी हैं। इनमें मृत घोषित मतदाताओं की संख्या करीब 46 लाख है। हालांकि, इस व्यापक कटौती ने सियासी दलों में हड़कंप मचा दिया है, खासकर सत्तारूढ़ भाजपा में।
इस स्थिति से निपटने के लिए भाजपा ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने मंत्रियों, सांसदों तथा विधायकों के साथ वर्चुअल बैठक कर संगठन को सक्रिय करने के निर्देश दिए। पार्टी ने हर पोलिंग बूथ पर कम से कम 200 नए मतदाताओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में कुल लगभग 1.77 लाख बूथ हैं, जिससे पार्टी का इरादा करीब 3.5 करोड़ नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने का है।
भाजपा की योजना में विशेष रूप से प्रवासी उत्तर प्रदेशियों और युवा मतदाताओं पर जोर है। पार्टी कार्यकर्ता उन मूल निवासियों से संपर्क कर रहे हैं जो नौकरी या अन्य कारणों से दिल्ली जैसे शहरों में रहते हैं, और उन्हें 2027 के चुनाव के लिए यूपी में नाम दर्ज कराने की अपील कर रहे हैं। इसके अलावा, सुरक्षा कारणों से गांवों में वोट रखवाने वाले लेकिन दूर होने से मतदान न कर पाने वाले लोगों को भी लक्ष्य बनाया जा रहा है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के तहत, मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार के लिए दावे-आपत्तियां 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दर्ज की जा सकेंगी। अंतिम सूची 6 मार्च 2026 को जारी होगी। इस दौरान भाजपा ने कार्यकर्ताओं को विकसित भारत अभियान के माध्यम से जनसंपर्क बढ़ाने और सरकारी योजनाओं की जानकारी फैलाने के भी निर्देश दिए हैं।