ग्वालियर शिक्षा संकट: 67 हजार छात्रों का डेटा अटका, 34 हजार बच्चे ‘ड्रॉप बॉक्स’ में फंसे

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में शिक्षा विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था में गंभीर खराबी सामने आई है। यूडीआईएसई (UDISE) और एजुकेशन पोर्टल के बीच छात्रों के आंकड़ों में करीब 67 हजार का फर्क पाया गया है। इनमें से सबसे ज्यादा चिंता की बात 34 हजार छात्र-छात्राओं की है, जो तकनीकी रूप से ‘लापता’ नहीं बल्कि एजुकेशन पोर्टल के ‘ड्रॉप बॉक्स’ में अटके हुए हैं।

यह समस्या तब उजागर हुई जब विभाग ने दोनों पोर्टलों के आंकड़ों की तुलना की। यूडीआईएसई पोर्टल पर दर्ज छात्रों की संख्या और एजुकेशन पोर्टल पर उपलब्ध डेटा में यह बड़ा अंतर सामने आया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कई बच्चे पुराने स्कूल से नए स्कूल में ट्रांसफर हो चुके हैं, लेकिन नए स्कूल ने उनके नामांकन डेटा को अपडेट या इंपोर्ट नहीं किया। नतीजतन, ये बच्चे सिस्टम में ‘ड्रॉप बॉक्स’ कैटेगरी में फंस गए, जिससे उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड, छात्रवृत्ति और अन्य लाभ प्रभावित हो रहे हैं।

समस्या के प्रमुख प्रभाव

  • छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ रुकना
  • शैक्षणिक सत्र के अंत में प्रमोशन और एडमिशन में संभावित दिक्कतें
  • डिजिटल शिक्षा व्यवस्था पर विश्वसनीयता का संकट

जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। उन्होंने सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ), ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर (बीआरसी) और संकुल प्राचार्यों को तत्काल निर्देश जारी किए हैं कि:

  • ड्रॉप बॉक्स में फंसे 34 हजार बच्चों के डेटा को जल्द से जल्द संबंधित स्कूलों में इंपोर्ट किया जाए।
  • कुल 67 हजार के अंतर को शून्य करने के लिए युद्ध स्तर पर काम हो।
  • लापरवाही बरतने वाले स्कूलों/कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ये बच्चे वास्तव में गायब नहीं हैं, बल्कि तकनीकी लापरवाही और डेटा अपडेट न होने के कारण सिस्टम में ‘अदृश्य’ हो गए हैं। विभाग का लक्ष्य है कि जल्द ही दोनों पोर्टलों के आंकड़े पूरी तरह से मैच करें ताकि छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो।

डिजिटल इंडिया के दावों पर सवाल 

सरकार की ओर से डिजिटल इंडिया और पेपरलेस शिक्षा की बात की जाती है, लेकिन ऐसी घटनाएं सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करती हैं। स्थानीय अभिभावक और शिक्षाविद् इस मामले में तेजी से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यदि समय पर सुधार नहीं हुआ तो इससे हजारों बच्चों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो सकता है।

शिक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि यह समस्या कुछ ही दिनों में हल कर ली जाएगी। अभिभावकों से अपील है कि वे अपने बच्चों के स्कूल प्राचार्य से संपर्क कर डेटा अपडेट की स्थिति जांचें।