ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखा 5वां पत्र; AI के इस्तेमाल पर उठाए गंभीर सवाल

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखे अपने पांचवें पत्र में वोटर लिस्ट के संशोधन (SIR) को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कहा है कि चुनाव आयोग अपने पिछले दो दशकों के उन वैधानिक सुधारों को खुद ही कुचल रहा है, जिन्हें पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया था। मुख्यमंत्री का सबसे बड़ा आरोप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर है; उनका दावा है कि 2002 के पुराने रिकॉर्ड्स को डिजिटल करने के लिए जिस एआई तकनीक का सहारा लिया गया, उसने गंभीर गलतियां की हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस तकनीकी चूक की वजह से लाखों वास्तविक मतदाताओं के नामों को ‘विसंगति’ की श्रेणी में डाल दिया गया है, जिससे आम जनता को अपनी पहचान फिर से साबित करने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने इसे एक “तकनीकी साजिश” करार दिया है जो करोड़ों लोगों को मताधिकार से वंचित कर सकती है। इसके अलावा, ममता बनर्जी ने इस बात पर भी कड़ा ऐतराज जताया है कि सत्यापन के लिए जमा किए गए दस्तावेजों की कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया अपारदर्शी और मशीनी हो गई है।

पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि निर्वाचन आयोग व्हाट्सएप जैसे अनौपचारिक माध्यमों से निर्देश जारी कर रहा है, जो असंवैधानिक है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि यदि एक भी वैध मतदाता का नाम लिस्ट से हटाया गया, तो उनकी पार्टी दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर का घेराव करेगी। इस विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया है, जहां उन्होंने इस पूरी ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ प्रक्रिया को मनमाना और दोषपूर्ण बताया है।