राष्ट्रपति मुर्मू ने जैसलमेर में ‘प्रचंड’ में को-पायलट बनकर उड़ान भरी

भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर में स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में सह-पायलट के रूप में उड़ान भरकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। वे इस प्रकार की लड़ाकू हेलीकॉप्टर में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं।

यह उड़ान भारतीय वायुसेना के प्रमुख युद्धाभ्यास ‘वायुशक्ति-2026’ के अवसर पर आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं। फ्लाइंग सूट और हेलमेट पहनकर राष्ट्रपति ‘प्रचंड’ के कॉकपिट में सवार हुईं। यह सॉर्टी दो ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों के फॉर्मेशन में हुई, जिसमें दूसरे हेलीकॉप्टर में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह मौजूद थे। उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने अभ्यास स्थल का हवाई सर्वेक्षण भी किया।

‘प्रचंड’ हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित भारत का पहला स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर है। यह उच्च ऊंचाई वाले इलाकों, रेगिस्तानी क्षेत्रों और कठिन परिस्थितियों में प्रभावी संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हेलीकॉप्टर 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर भी टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है, जो इसे सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी बनाता है।

राष्ट्रपति की इस उड़ान को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सशस्त्र बलों का मनोबल बढ़ा है और देश की रक्षा क्षमताओं का मजबूत संदेश गया है।

‘वायुशक्ति-2026’ अभ्यास में वायुसेना ने विभिन्न लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और उन्नत हथियार प्रणालियों के माध्यम से अपनी मारक क्षमता और परिचालन तैयारियों का प्रदर्शन किया। यह अभ्यास वायु शक्ति की ताकत और सैन्य दक्षता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का प्रमुख माध्यम है।

राष्ट्रपति मुर्मू इससे पहले भी कई बार सशस्त्र बलों के आधुनिक प्लेटफॉर्म्स के साथ जुड़ चुकी हैं। दिसंबर में उन्होंने नौसेना की कलवरी क्लास पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर यात्रा की थी। अक्टूबर में अंबाला एयरबेस से राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी, जबकि अप्रैल 2023 में तेजपुर एयरबेस से सुखोई-30 एमकेआई में सॉर्टी की थी।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन उड़ानों से भारतीय सेनाओं की आधुनिकीकरण, तकनीकी श्रेष्ठता और स्वदेशी रक्षा निर्माण की प्रगति स्पष्ट रूप से झलकती है। राष्ट्रपति की भागीदारी सैनिकों के प्रति सम्मान और देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने का प्रतीक है।