ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत: अमेरिका-इज़राइल हमलों में मारे गए

ईरान से आई सबसे बड़ी खबर ने पूरे मध्य पूर्व को हिला कर रख दिया है। अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि हो गई है। ईरानी राज्य मीडिया ने इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसे ‘इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक की मौत’ बताते हुए घोषणा की थी।

खामेनेई, जो 1989 से ईरान पर शासन कर रहे थे, तेहरान में अपने कार्यालय या आवास पर हुए हवाई हमले में मारे गए। इस घटना के साथ ही 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद स्थापित इस्लामिक गणराज्य में अब सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ईरान ने खामेनेई की मौत पर 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया है और बदले की कार्रवाई में इज़राइल तथा क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि खामेनेई की मौत से ईरान की आंतरिक व्यवस्था और क्षेत्रीय प्रभाव में बड़े बदलाव आ सकते हैं। पिछले कई दशकों से ईरान अमेरिका-विरोधी और इज़राइल-विरोधी ताकतों का प्रमुख समर्थक रहा है। ईरान के समर्थन से मजबूत हुए संगठन जैसे हमास, हिजबुल्लाह और हूती अब संसाधनों और नेतृत्व के संकट का सामना कर सकते हैं। इन संगठनों के कमजोर पड़ने से लेबनान, यमन और गाजा जैसे इलाकों में इज़राइल की सुरक्षा स्थिति मजबूत हो सकती है।

इस बीच, निर्वासित ईरानी क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि वे लोकतांत्रिक संक्रमण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकते हैं। रजा पहलवी ने अमेरिका के समर्थन से एक नई संविधान और स्वतंत्र चुनावों की वकालत की है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान में अमेरिका समर्थित या उदारवादी सरकार बनती है, तो मध्य पूर्व का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

सऊदी अरब, यूएई, बहरीन जैसे सुन्नी बहुल देश पहले से ही अब्राहम समझौतों के तहत इज़राइल के साथ संबंध सामान्य कर चुके हैं। ईरान अब तक क्षेत्र में इज़राइल विरोध का मुख्य केंद्र था, लेकिन शासन परिवर्तन के बाद यह मोर्चा कमजोर पड़ सकता है। इससे इज़राइल की क्षेत्रीय स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।