अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के रणनीतिक स्थलों पर 28 फरवरी को किए गए सैन्य हमलों के बाद क्षेत्र में तेजी से बढ़े तनाव ने वैश्विक विमानन क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। ईरान की जवाबी कार्रवाई के चलते कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र को नागरिक विमानों के लिए बंद कर दिया, जिससे मध्य पूर्व के प्रमुख हवाई अड्डों पर सन्नाटा छा गया है।
ईरान, इराक, कुवैत, बहरीन, कतर, जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और इजराइल जैसे देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस प्रतिबंधित कर दिया है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इन क्षेत्रों में हवाई यातायात लगभग पूरी तरह रुक गया है। दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे विश्व के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हब एयरपोर्ट प्रभावित हुए हैं, जहां हजारों यात्री फंस गए हैं और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।
भारत में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, इन प्रतिबंधों के कारण शनिवार (28 फरवरी) को भारतीय एयरलाइंस की करीब 410 उड़ानें रद्द की गईं। रविवार (1 मार्च) को भी लगभग 444 उड़ानों के रद्द होने की संभावना है, जिससे कुल प्रभावित उड़ानों की संख्या 850 से अधिक हो सकती है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय एयरलाइंस को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें 2 मार्च तक ईरान सहित 11 प्रभावित देशों के हवाई क्षेत्र का उपयोग न करने की सलाह दी गई है। इस निर्देश के बाद इंडिगो, एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने खाड़ी देशों के लिए अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं।
यूरोप और उत्तरी अमेरिका की उड़ानों पर भी असर पड़ा है, क्योंकि सामान्य रूट बंद होने से विमानों को लंबे वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं। इससे उड़ान समय में वृद्धि के साथ-साथ ईंधन खपत और परिचालन लागत में काफी इजाफा हुआ है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों की मदद के लिए 24×7 पैसेंजर असिस्टेंस कंट्रोल रूम सक्रिय किया है। हवाई अड्डों पर अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती की गई है और एयरसेवा पोर्टल के जरिए शिकायतों का त्वरित निपटारा किया जा रहा है। 28 फरवरी को दर्ज 216 शिकायतों में से आधी से अधिक का समाधान कर यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था मुहैया कराई गई। प्रभावित यात्रियों को एयरलाइंस द्वारा टिकट रीशेड्यूलिंग या पूर्ण रिफंड के विकल्प दिए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व का यह संकट लंबा खिंचा तो भारत से खाड़ी और पश्चिमी देशों की हवाई यात्रा न केवल महंगी होगी, बल्कि उड़ानों की उपलब्धता में और कमी आ सकती है। स्थिति पर सभी एयरलाइंस और नियामक संस्थाएं लगातार नजर बनाए हुए हैं।