मिडिल ईस्ट संकट: मोदी ने नेतन्याहू और यूएई राष्ट्रपति से बात कर युद्धविराम की अपील की

मिडिल ईस्ट में युद्ध का संकट गहराता जा रहा है। अमेरिका और इज़रायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस बीच भारत ने शांति बहाली के लिए सक्रिय कूटनीति शुरू की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से टेलीफोन पर बातचीत की। उन्होंने हालिया घटनाक्रम पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए युद्धविराम की तत्काल अपील की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि हिंसा के बजाय संवाद के माध्यम से विवाद सुलझाना चाहिए।

इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने यूएई पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई और 58 घायल हुए, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने इन हमलों में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की और यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए प्रशासन का आभार जताया। उन्होंने मुश्किल समय में भारत की एकजुटता दोहराई और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दिया।

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में बिगड़ती स्थिति के वैश्विक और रणनीतिक प्रभावों का जायजा लेने के लिए सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, युद्ध के कारण तेल आपूर्ति पर पड़ने वाले असर और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभावों की गहन समीक्षा की गई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सेना प्रमुखों के साथ विचार-विमर्श में भारत की सैन्य व कूटनीतिक तैयारियों का मूल्यांकन किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने स्थिति बिगड़ने पर खाड़ी देशों से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए आपातकालीन योजना तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। भारत का रुख साफ है कि लंबे संघर्ष से पूरी दुनिया को भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर तनाव घटाने और शांति स्थापित करने के प्रयास तेज करने चाहिए।