ईरान का आरोप: इजराइल-अमेरिका महिलाओं और बच्चों को निशाना बना रहे

ईरान ने मुस्लिम समुदायों और देशों से अपील की है कि वे इजराइल और अमेरिका के सैनिकों, उनके ठिकानों तथा गतिविधियों से जुड़ी कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करें। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में जानबूझकर महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है, जिसे वे “नागरिक नरसंहार” बता रहे हैं।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और सरकारी सूत्रों ने दावा किया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 1,300 से अधिक ईरानी नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमें सैकड़ों बच्चे और महिलाएं शामिल हैं। ईरान के अनुसार, एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले में भी बड़ी संख्या में बच्चे मारे गए। ईरानी विदेश मंत्रालय और IRGC ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया है और मुस्लिम दुनिया से दुश्मन की कमजोरियों का पता लगाने में सहयोग मांगा है।

दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने पुष्टि की है कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अब तक लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। इनमें से अधिकांश चोटें मामूली हैं और 108 सैनिक ड्यूटी पर लौट चुके हैं, जबकि 8 की हालत गंभीर बताई गई है। पेंटागन के अनुसार, 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हो चुकी है। ईरान ने इन हमलों का जवाब देते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर क्षेत्रीय देश अमेरिकी ठिकानों को इस्तेमाल करने की अनुमति देते हैं, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा। ईरान का कहना है कि उसके हमले केवल सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित हैं, जबकि दुश्मन नागरिक क्षेत्रों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बना रहा है।

अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

यह संघर्ष 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है और तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया है। कई मुस्लिम देश अभी तटस्थ हैं, लेकिन ईरान की अपील से कुछ इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। अमेरिका और इजराइल ने ईरान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके हमले केवल सैन्य सुविधाओं पर हैं।