उत्तर प्रदेश के संभल जिले के बिछौली गांव में गुरुवार सुबह जिला प्रशासन ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे वाले ईदगाह और इमामबाड़े को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई में करीब 6.5 करोड़ रुपये मूल्य की लगभग एक हेक्टेयर सरकारी जमीन कब्जामुक्त की गई, जो चरागाह और खाद के गड्ढों के लिए आरक्षित थी। प्रशासन ने भारी पुलिस बल की सुरक्षा में यह कार्रवाई तहसीलदार कोर्ट के आदेश पर की।
कार्रवाई की टीम सुबह करीब 7:30 बजे एसडीएम निधि पटेल और डिप्टी तहसीलदार दीपक कुमार जुरेल के नेतृत्व में चार जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। ईदगाह को मात्र कुछ मिनटों में जमींदोज कर दिया गया, जबकि इमामबाड़े पर तोड़फोड़ का काम जारी रहा। प्रशासन के अनुसार, 31 जनवरी 2026 को अखबारों में नोटिस प्रकाशित किया गया था, लेकिन किसी ने भी भूमि पर अपना दावा नहीं किया। यह पूरी प्रक्रिया लैंड बैंक योजना के तहत अवैध अतिक्रमण हटाने का हिस्सा है, जिसमें पिछले डेढ़ साल में जिले की 125 हेक्टेयर से ज्यादा सरकारी जमीन पहले ही मुक्त कराई जा चुकी है।
कार्रवाई शुरू होते ही गांव में स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। कुछ ग्रामीणों ने खुद इमामबाड़े को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें तुरंत रोक दिया और भीड़ को खदेड़ दिया। पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया, जहां पांच थानों की पुलिस और एक कंपनी पीएसी तैनात रही। छतों पर स्नाइपर्स की निगरानी भी की गई ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक ने दोपहर में मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने कहा कि बुलडोजर चलाने का खर्च कब्जाधारियों से वसूला जाएगा और कोई बड़ा तनाव नहीं हुआ। एक जेसीबी ऑपरेटर को दीवार गिरने से हल्की चोट आई।
स्थानीय महिला जुबैदा ने कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जगह गरीबों की शादियों और सामान्य सुविधाओं के लिए इस्तेमाल होती थी। उन्होंने सवाल किया कि अगर कानून सबके लिए बराबर है तो सरकारी जमीन पर बने मंदिरों पर भी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। एक अन्य ग्रामीण रहत जान ने बताया कि रात में खबर मिलते ही कुछ लोगों ने खुद तोड़ना शुरू कर दिया था, लेकिन टीम ने उन्हें रोक दिया। प्रशासन का स्पष्ट पक्ष है कि यह धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण था और कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के बाद की गई।