पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने केंद्रीय कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक और सहायकों के रूप में नियुक्त करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ TMC की अपील पर कोई अलग आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जोयमल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि मतगणना कर्मियों की नियुक्ति चुनाव आयोग का विशेष अधिकार है। अदालत ने चुनाव आयोग के उस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया जिसमें कहा गया कि 13 अप्रैल के सर्कुलर का पूरा पालन किया जाएगा। इस सर्कुलर में केंद्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी मतगणना ड्यूटी में शामिल करने की व्यवस्था है।
मामले की शुरुआत चुनाव आयोग के उस निर्देश से हुई जिसमें पश्चिम बंगाल की मतगणना (4 मई) के लिए प्रत्येक केंद्र पर कम से कम एक केंद्रीय या सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSU) के कर्मचारी को पर्यवेक्षक के रूप में तैनात करने का प्रावधान किया गया था। TMC ने इसे राज्य कर्मचारियों को बाहर करने वाला बताकर पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल को याचिका खारिज कर दी और कहा कि चुनाव आयोग को केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारियों में से किसी को भी चुनने का पूरा अधिकार है।
TMC ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उसने दावा किया कि केवल केंद्रीय कर्मचारियों पर निर्भरता मतगणना की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कोई रोक नहीं लगाई और चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र को बरकरार रखा।
चुनाव आयोग का पक्ष रहा है कि यह कदम मतगणना प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए उठाया गया है। अदालत ने भी CCTV, माइक्रो-ऑब्जर्वर जैसी अन्य व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भरोसा जताया।