मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित धर्मनगरी चित्रकूट में भारी वर्षा के कारण मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर पहुंच गया और 23 वर्ष पुराना रिकॉर्ड भी टूट गया। इससे रामघाट समेत आसपास के निचले इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए।
बाढ़ के कारण रामघाट क्षेत्र में करीब चार सौ दुकानें पानी में समा गईं। कई होटल, मठ और मंदिर भी प्रभावित हुए। लोग घरों और इमारतों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हो गए। तेज धारा में रामघाट-हनुमानधारा मार्ग पर बना लगभग तीन सौ मीटर लंबा पुराना पुल टूटकर बह गया। इससे दोनों राज्यों के बीच सड़क संपर्क बाधित हो गया।
सतना जिले में भी स्थिति गंभीर रही। प्रशासन ने जिले के करीब छत्तीस गांवों में हाई अलर्ट जारी किया। भारी बारिश और बाढ़ के खतरे को देखते हुए सतना तथा मैहर क्षेत्रों में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया।
राहत और बचाव कार्यों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और सेना की टीमें सक्रिय रहीं। हेलीकॉप्टर तथा नावों की मदद से सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। प्रभावित परिवारों के लिए राहत शिविर भी स्थापित किए गए, जहां भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।