सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर सड़क चौड़ीकरण के दौरान शहर के सती गेट इलाके में स्थित प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा विवाद का केंद्र बन गई है। मंदिर का ढांचा तो हटा लिया गया, लेकिन करीब आठ फुट ऊंची प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। भक्तों का कहना है कि प्रशासन ने कई दिनों तक मशीनों से प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब प्रशासन ने साफ कहा है कि प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश ही नहीं की गई।
घटना का सिलसिला
सिंहस्थ महाकुंभ 2028 से पहले कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इस परियोजना के दायरे में खड़े हनुमान मंदिर आ गया, जिसे करीब 150-170 साल पुराना बताया जाता है। स्थानीय लोगों और पुजारी से बातचीत के बाद मंदिर का शिखर, दीवारें और गर्भगृह हटा दिए गए। प्रतिमा की सुरक्षा के लिए टेंट लगा दिया गया।
भक्तों और कुछ रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर की शुरुआत से प्रतिमा को स्थानांतरित करने के कई प्रयास हुए। जेसीबी और क्रेन जैसी मशीनों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि पुरानी इंटरलॉक तकनीक से प्रतिमा जमीन में मजबूती से जुड़ी हुई है। इसके बाद IIT इंदौर और पुरातत्व विभाग की टीमों को जांच के लिए बुलाया गया।
प्रशासन का स्पष्टीकरण
10 सितंबर को उज्जैन के एसडीएम एल.एन. गर्ग ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर फैली खबरें गलत हैं। उन्होंने कहा कि अब तक प्रतिमा को हटाने या खिसकाने का कोई प्रयास, न मशीन से और न हाथ से किया गया है। आगे कोई कदम विशेषज्ञों की वैज्ञानिक जांच और संत समाज व श्रद्धालुओं की सहमति के बाद ही उठाया जाएगा। प्रशासन ने विकास कार्यों और धार्मिक आस्था दोनों को समान महत्व देने की बात कही है। नई जगह पर मंदिर की तैयारी चल रही थी, लेकिन फिलहाल विस्थापन पर रोक लगा दी गई है।
आस्था का सैलाब
सोशल मीडिया पर फैलने के बाद प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। रोज हजारों लोग आरती, हनुमान चालीसा और भजन में शामिल हो रहे हैं। कई इसे चमत्कार मान रहे हैं और हनुमान जी की इच्छा बता रहे हैं। स्थानीय लोग इस मंदिर को “डॉक्टर हनुमान” भी कहते हैं, जहां मन्नतें पूरी होने की गहरी आस्था है। पुजारी और संतों ने किसी भी जबरदस्ती के खिलाफ आवाज उठाई है।