Irresponsible MP government on Crop Insurance: मध्यप्रदेश में इस बार सरकार की सुस्ती और लापरवाही किसानों पर भारी पड़ सकती है। प्रदेश के लाखों किसानों ने खरीफ सीजन की बोवनी समय पर कर दी है, लेकिन सरकार अब तक फसल बीमा योजना की अधिसूचना जारी नहीं कर पाई है। इससे 47.12 लाख हेक्टेयर फसल बिना बीमा कवरेज के रह गई है, जिससे करीब 24 लाख किसान आर्थिक संकट में आ सकते हैं। अगर मौसम की मार से फसल को नुकसान हुआ तो इन किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिल पाएगा।
समय से पहले नहीं हुई अधिसूचना जारी
फसल बीमा योजना की गाइडलाइंस के मुताबिक, हर फसल सीजन से कम से कम एक महीने पहले बीमा अधिसूचना जारी हो जानी चाहिए। इसके आधार पर बीमा कंपनियां प्रीमियम दरें तय करती हैं और किसान पंजीकरण कराते हैं। लेकिन इस बार जुलाई शुरू हो गया है, फिर भी राज्य सरकार ने अब तक अधिसूचना जारी नहीं की है। 2022 और 2024 में अधिसूचना मई में और 2023 में जून में जारी हो चुकी थी, जबकि इस साल सरकारी विभाग की अब सक्रिय नहीं हो पाया है।
किसानों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा
एमपी में अब तक 85 प्रतिशत से ज्यादा किसानों ने खरीफ फसलों की बोवनी कर ली है। इस सीजन में आमतौर पर बीमा कवरेज 1 जुलाई से 30 अगस्त तक रहता है। लेकिन बीमा योजना की अधिसूचना नहीं होने के कारण अबतक पोर्टल बंद है और किसान बीमा नहीं करवा पाए है। ऐसे में अगर किसी कारणवश जैसे अधिक बारिश या कीट हमले से फसल को नुकसान होता है, तो बिना बीमा के किसानों को कोई आर्थिक मदद नहीं मिल सकेगी।
कैसे तय की जाती है बीमा की राशि
फसल बीमा योजना के तहत क्लेम की राशि बीमित राशि के आधार पर तय होती है। यह राशि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति तय करती है। जितनी अधिक बीमित राशि होती है, उतना अधिक प्रीमियम भी देना होता है। लेकिन इसी अनुपात में मुआवजा भी ज्यादा मिलता है। ऐसे में सरकार की निष्क्रियता से किसान संकट में है।
क्या है मौसम का हाल
मध्यप्रदेश में मौसम की स्थिति अस्थिर रहती है
कहीं अतिवृष्टि तो कहीं सूखे के हालात बनते हैं। ऐसे में फसल बीमा किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह होता है। अगर बीमा समय पर हो, तो बोवनी के तुरंत बाद भी नुकसान होने पर किसान क्लेम के हकदार होते हैं। लेकिन इस बार अधिसूचना में देरी के कारण किसान न सिर्फ बीमा से वंचित हो सकते हैं, बल्कि किसी आपदा की स्थिति में उन्हें मुआवजा भी नहीं मिल पाएगा।