ग्वालियर में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ठगों ने एक बुजुर्ग दंपति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करके उनसे 7 लाख 10 हजार रुपये ठग लिए। यह घटना तब सामने आई जब किसी तरह बुजुर्ग दंपति ठगों के चंगुल से बचकर पुलिस के पास पहुंचे। ठगों ने खुद को पुलिस और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के अधिकारी बताकर इस वारदात को अंजाम दिया।
22 दिनों तक चला ‘डिजिटल अरेस्ट’
यह चौंकाने वाली घटना 22 दिनों तक चली। साइबर अपराधियों ने ग्वालियर के एक रिटायर्ड कर्मचारी अवनीश चंद्र मदनावत और उनकी पत्नी को निशाना बनाया। ठगों ने उन्हें दिल्ली क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर फोन किया और कहा कि उनके आधार कार्ड से अवैध रूप से दो सिम कार्ड जारी किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल 700 करोड़ रुपये के लेनदेन में हुआ है। इस जाल में फंसाकर ठगों ने उन्हें धमकाया कि यह एक गंभीर अपराध है और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया जा रहा है।
वीडियो कॉल के जरिए 24 घंटे निगरानी
ठगों ने इस दौरान बुजुर्ग दंपति पर पूरी तरह से शिकंजा कसा। वे दिन-रात वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखते थे। उन्हें एक-दूसरे से भी बात करने की अनुमति नहीं थी और जब वे आपस में बात करते तो ठग उन्हें टोकते थे। यहां तक कि घर से बाहर जाने पर भी उन्हें अपना फोन ऑडियो कॉल पर रखने का निर्देश दिया जाता था ताकि उनकी हर गतिविधि की निगरानी की जा सके। डर के मारे दंपति ने ठगों की सारी बात मानी और धीरे-धीरे अपने खाते से 7 लाख 10 हजार रुपये एक फिरोजाबाद स्थित बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस ने पहले लौटाया, फिर दर्ज किया मामला
जब दंपति ने अपनी जमा-पूंजी गंवा दी और उन्हें ठगी का एहसास हुआ, तो वे गोला मंदिर थाने पहुंचे। हालांकि, शुरुआत में थाना प्रभारी ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें क्राइम ब्रांच जाने को कहकर लौटा दिया। बाद में जब मामला सुर्खियों में आया तो पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। यह घटना साइबर अपराधों के प्रति लगातार जागरूकता अभियानों के बावजूद लोगों के फंसने की गंभीर चुनौती को दर्शाती है।