भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन: समग्र विकास के लिए तैयार हो रहा खाका

Bhopal Metropolitan Region: राजधानी भोपाल को मेट्रोपॉलिटन रीजन के रूप में विकसित करने के लिए लाया गया मप्र महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास विधेयक-2025 कुछ दिनों पहले पास हो गया है। अब राजधानी में भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन विकसित करने के लिए तेजी से काम शुरू हो गया है। जिले की सभी 8 तहसीलों/नजूल क्षेत्र से समस्त जानकारी तलब की गई है, ताकि इस पर समग्र दृष्टिकोण से काम किया जा सके। बीते दिनों कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सभी अधीनस्थ और जिम्मेदार अफसरों को कार्ययोजना के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अब सभी एसडीएम और तहसीलदार अपने स्तर पर जिले की जानकारी एकत्रित करने में जुट गए हैं।

इन जिलों के ये क्षेत्र होंगे शामिल

  • भोपाल जिले के हुजूर, बैरसिया, कोलार
  • रायसेन जिले के रायसेन, औबेदुल्लागंज
  • विदिशा जिले के विदिशा, ग्यारसपुर, गुलाबगंज
  • राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़, जीरापुर, ब्यावरा, पिछोर, खुजनेर
  • सीहोर जिले के सीहोर, इछावर, आष्टा, श्यामपुर, जावर

बनेंगी सेटेलाइट कॉलोनियां, पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इंतजाम होंगे बेहतर

मेट्रोपॉलिटन रीजन में सेटेलाइट टाउन बनाकर नए आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। अतिरिक्त आबादी को इसमें बसाया जाएगा। शहरी क्षेत्र की बजाय रीजन के रूरल एरिया में विशेष आवासीय क्षेत्र बनाकर लोगों को बसाएंगे और कार्यस्थल पर आवाजाही के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करेंगे। रीजन में नए टूरिस्ट सेंटर व सर्किट तय किए जाएंगे। इसमें जिन-जिन क्षेत्रों में टूरिस्ट सेंटर या स्पॉट होंगे, वहां पर और विकास कार्य किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोग इन इलाकों में आएं। कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान होगा, जिसमें रोड, प्राकृतिक नाले, जनसुविधाएं व सेवाओं के साथ रीजन के आर्थिक विकास का पूरा मैप रहेगा। कुल मिलाकर एक विकसित शहर के लिए क्या-क्या प्लान जरूरी है, उस पर काम किया जाएगा।

मास्टरप्लान लागू नहीं होने से इस ओर तेजी से बढ़े कदम

भोपाल मास्टरप्लान-2047 को लेकर काम चल रहा है। करीब 20 साल से भोपाल की जनता को मास्टरप्लान का इंतजार है, लेकिन यह हर बार टल रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो मास्टरप्लान का ड्राफ्ट जारी नहीं होने से रियल एस्टेट सेक्टर और बड़े निवेशक असमंजस में है। ऐसे में लगातार भोपाल और आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। यह तय नहीं हो पा रहा है कि भविष्य में किस क्षेत्र में विकास होगा या नहीं। ऐसे में मेट्रोपॉलिटन रीजन को लागू करने की दिशा में तेजी से काम हुआ।