रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान: सेनाओं को हर परिस्थिति के लिए रहना होगा तैयार

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को सेना को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में देश की सुरक्षा व्यवस्था और भी सशक्त होनी चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत की सेनाओं को सिर्फ सीमित संघर्षों के लिए ही नहीं, बल्कि लंबी अवधि तक चलने वाली जंग के लिए भी हमेशा तैयार रहना होगा।

महू के आर्मी वॉर कॉलेज में कार्यक्रम

रक्षा मंत्री यह संबोधन मध्य प्रदेश के महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान कर रहे थे। इस अवसर पर भारत के तीनों सेनाओं के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी शामिल हुए। सभी वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को और अधिक अहम बना दिया।

छोटी लड़ाइयों से लेकर लंबी जंग तक की तैयारी जरूरी

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में सुरक्षा चुनौतियाँ पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल हो चुकी हैं। भारत के सामने सीमावर्ती क्षेत्रों में छोटी झड़पों से लेकर साइबर अटैक और हाइब्रिड वॉर जैसी नई परिस्थितियाँ भी उत्पन्न हो रही हैं। ऐसे में हमारी सेनाओं को हर मोर्चे पर सक्षम होना पड़ेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य में पाँच साल तक चलने वाली किसी भी संभावित लड़ाई के लिए भी सेनाओं की तैयारी पूरी होनी चाहिए।

आत्मनिर्भर भारत और सेनाओं की मजबूती

रक्षा मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि सरकार लगातार सेनाओं को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से लैस करने की दिशा में काम कर रही है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना न केवल आत्मनिर्भर बनेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी शक्ति का और भी प्रभावी प्रदर्शन करेगी

सुरक्षा और कूटनीति का संतुलन

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत हमेशा शांति का समर्थक रहा है और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों की इच्छा रखता है। लेकिन अगर कभी देश की संप्रभुता और अखंडता पर खतरा आया तो हमारी सेनाएँ किसी भी चुनौती का डटकर सामना करने के लिए तैयार रहेंगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मजबूत सेना ही मजबूत कूटनीति की नींव होती है।