भोपाल (मध्यप्रदेश)। राजधानी में साइबर अपराधियों ने एक निजी संस्था के ग्राहकों को भेजे गए ई-गिफ्ट वाउचर कोड्स हैक कर ऑनलाइन सोना और चांदी खरीद ली। यह सब कुछ असली विजेताओं तक कोड पहुँचने से पहले ही कर लिया गया। साइबर पुलिस के अनुसार, प्रदेश में इस तरह का यह पहला मामला है।
जानकारी के मुताबिक, एमपी नगर स्थित एक कंपनी ने अपने प्रमोशनल कैंपेन के तहत ग्राहकों को ई-गिफ्ट वाउचर SMS के जरिए भेजे थे। ये वाउचर नामी कंपनियों से खरीदे गए थे और इन्हें सोना-चांदी की ख़रीद में इस्तेमाल किया जाना था। लेकिन जब विजेता प्लेटफ़ॉर्म पर वाउचर रिडीम करने पहुँचे, तो उन्हें बताया गया कि कोड पहले ही इस्तेमाल हो चुके हैं।
साइबर अपराधियों ने किया डेटाबेस हैक
जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों ने वाउचर के सीरियल कोड पहले ही हासिल कर लिए और उनका उपयोग सोना-चांदी की ऑनलाइन ख़रीद में किया। एमपी नगर की इस फर्म के आठ वाउचर इस तरह से हैक हुए, जबकि कंपनी की आंतरिक जांच में पाया गया कि ऐसे कम से कम 57 वाउचर अन्य मामलों में भी धोखाधड़ी से रिडीम किए जा चुके हैं।
पुलिस ने एक मामले में सात वाउचर की रिडेम्पशन यूपी के मथुरा निवासी तक ट्रेस की। यह फ्रॉड 15 जुलाई को किया गया था। पुलिस को शक है कि इसके पीछे बड़ा साइबर नेटवर्क सक्रिय है, जो या तो डेटा लीक या ई-कॉमर्स डेटाबेस हैक करके वाउचर कोड चुरा रहा है।
एफआईआर दर्ज, साइबर क्राइम ब्रांच जांच में जुटी
कंपनी प्रबंधक की शिकायत पर 20 अगस्त को एफआईआर दर्ज की गई। साइबर क्राइम ब्रांच यह पता लगाने में जुटी है कि डेटा कंपनी के सर्वर से सीधे चोरी हुआ या किसी लीक के जरिए अपराधियों तक पहुँचा। नुकसान की सटीक राशि अभी सामने नहीं आई है।
अधिकारियों के मुताबिक, अब साइबर अपराधी नेटवर्क क्रिप्टो वॉलेट, डिजिटल म्यूल अकाउंट और चोरी के पैसों को सोना-चांदी जैसे फिजिकल एसेट्स में बदलने का तरीका अपनाने लगे हैं। इससे ट्रांजैक्शन ट्रैक करना और फंड्स रिकवर करना बेहद मुश्किल हो जाता है।