रावण से भी शक्तिशाली ‘सहस्र रावण’ कौन था? जिसे श्री राम नहीं, बल्कि माता सीता ने मारा

हिंदू पौराणिक कथाओं में रावण (दशानन) के बारे में सब जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक और रावण था जो उससे भी कहीं अधिक शक्तिशाली और अजेय था? हम बात कर रहे हैं ‘सहस्र रावण’ की, जिसका अंत स्वयं भगवान राम नहीं, बल्कि उनकी पत्नी माता सीता के हाथों हुआ था। यह अद्भुत और रोचक कथा हमें ‘अद्भुत रामायण’ जैसे ग्रंथों में मिलती है, जो नारी शक्ति की सर्वोच्चता को दर्शाती है।

सहस्र रावण: कौन था यह महाबली?

सहस्र रावण को ‘हज़ार सिरों वाला रावण’ या ‘सहस्रमुख रावण’ भी कहा जाता था। माना जाता है कि वह दशानन रावण का बड़ा भाई या चचेरा भाई था, जो लंका के बजाय पुष्करद्वीप का शासक था। उसने घोर तपस्या करके ब्रह्माजी से एक विशेष वरदान प्राप्त किया था। इस वरदान के कारण, उसे कोई पुरुष, देवता या राक्षस नहीं मार सकता था। उसका वध केवल एक स्त्री के हाथों ही संभव था।

श्रीराम को दी चुनौती और युद्ध का भीषण परिणाम

दशानन रावण के वध के बाद जब पूरी दुनिया में श्रीराम के पराक्रम की चर्चा थी, तब सहस्र रावण का अहंकार जाग उठा। रावण के वध को सहस्र रावण ने अपने कुल का अपमान समझा। उसने अपने भाई का बदला लेने और अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए सीधे भगवान राम को युद्ध के लिए चुनौती दी।

अद्भुत रामायण के अनुसार, सहस्र रावण की शक्तियों के सामने राम और उनकी चतुरंग सेना (जिसमें लक्ष्मण, हनुमान और विभीषण शामिल थे) टिक नहीं पाई। युद्ध इतना भीषण था कि सहस्र रावण ने अपने दिव्य अस्त्रों के प्रभाव से स्वयं श्रीराम को मूर्छित कर दिया।

महाकाली रूप में सीता ने किया संहार

जब श्रीराम मूर्छित हो गए और पराजय सुनिश्चित दिखी, तब माता सीता ने संसार को इस महाबली से मुक्ति दिलाने का बीड़ा उठाया। अपने पति को संकट में देख, माता सीता ने अपना सौम्य रूप त्याग दिया और महाकाली (भैरवी) का अत्यंत विकराल और भयंकर रूप धारण किया, जिसे कुछ कथाओं में ‘असिता’ भी कहा गया है। माता सीता ने महाकाली के इस रूप में एक ही क्षण में सहस्र रावण के सभी हज़ार सिर काट डाले और उसका संहार कर दिया।

यह कथा न केवल रामायण के एक अज्ञात अध्याय को सामने लाती है, बल्कि यह भी स्थापित करती है कि स्त्री शक्ति (नारी शक्ति) ही इस ब्रह्मांड की सबसे बड़ी और सर्वोच्च शक्ति है। 

यह कथा ‘अद्भुत रामायण’ से ली गई है।