“मध्य प्रदेश में मानसून की मार: रीवा-सिंगरौली में 8 इंच बारिश का रेड अलर्ट, 17 जिलों में येलो चेतावनी”

मध्य प्रदेश में मानसून के विदाई दौर में एक बार फिर मौसम ने तेवर दिखाए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों के लिए पूरे प्रदेश में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। पूर्वी मध्य प्रदेश के चार जिलों – रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली – में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जहां 24 घंटों में 8 इंच तक पानी गिरने की संभावना है। इसके अलावा, जबलपुर सहित 17 अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी है, जो बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ा रहा है।

वर्षा का कारण और प्रभावित क्षेत्र

मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे निम्न दबाव क्षेत्र और ऊपरी हवाओं के कारण यह सक्रियता बढ़ रही है। यह सिस्टम पूर्वी भागों में तेज वर्षा ला रहा है, जबकि पश्चिमी क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी की उम्मीद है। ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में रीवा डिवीजन के अंतर्गत आने वाले ये इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। यहां नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

येलो अलर्ट 17 जिलों – जबलपुर, सतना, पन्ना, मैहर, दमोह, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा – पर लागू है। इन क्षेत्रों में 4 से 6 इंच तक बारिश दर्ज होने की आशंका है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में धूप खिलने की संभावना है, लेकिन अचानक गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

हालिया वर्षा का जायजा

पिछले 24 घंटों में पूर्वी मध्य प्रदेश ने पहले ही अच्छी बारिश का सामना किया है। सिंगरौली में 7 इंच से अधिक, सीधी में 4.8 इंच और उमरिया में 0.75 इंच वर्षा दर्ज की गई। जबलपुर और सागर डिवीजन में भी हल्की से मध्यम बरसात हुई, जिससे कुछ निचले इलाकों में जलभराव की शिकायतें आई हैं। पचमढ़ी जैसे पर्यटन स्थलों पर 1.5 इंच बारिश ने ठंडक बढ़ा दी है। हालांकि, ग्वालियर और इंदौर जैसे पश्चिमी जिलों में वर्षा का प्रतिशत औसत से 25% अधिक रहा है।

प्रशासन की तैयारी और सलाह

प्रदेश सरकार ने अलर्ट जारी करते ही राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। NDRF की टीमें रीवा, सिंगरौली और जबलपुर में तैनात की गई हैं। जिला कलेक्टरों को नदियों के जलस्तर पर नजर रखने और स्कूल-कॉलेज बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। सिंगरौली में पहले ही स्कूलों को अवकाश घोषित कर दिया गया है।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहें, नदियों के किनारे न जाएं और बिजली-पानी की लाइनों से सावधानी बरतें। किसानों को फसल सुरक्षा के लिए सलाह दी गई है, क्योंकि अतिवृष्टि से धान और सब्जी की फसलें प्रभावित हो सकती हैं।

विशेषज्ञों की राय

IMD के भोपाल केंद्र के निदेशक ने बताया, “यह मानसून का अंतिम दौर है, लेकिन सिस्टम की तीव्रता के कारण पूर्वी जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। अगले दो दिनों तक सतर्क रहें।” जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी अचानक भारी वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो प्रदेश की कृषि और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा रही हैं।प्रदेश में कुल मिलाकर 37% अधिक वर्षा दर्ज हो चुकी है, जो किसानों के लिए वरदान तो है, लेकिन अतिवृष्टि से चुनौतियां भी पैदा कर रही है।