आदमपुर खंती : आसान नहीं 1 साल में 12 लाख टन कचरा साफ करना ?

नगर निगम की नई कमिश्नर संस्कृति जैन के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती एक साल के भीतर आदमपुर खंती में लगे कचरे के पहाड़ को साफ करवाना है। आदमपुर छावनी में बने कचरे के पहाड़ को साफ करने के लिये नगर निगम ने अभी तक यहां पर करोडों रूपये फूंक दिये हैं लेकिन उसके बाद भी यह खत्म नहीं हो पा रहा है। हालत यह है कि इस समय आदमपुर कचरा खंती में करीब 10 से 12 लाख टन कचरा जमा है।

रोज 800 टन कचरा पहुंचता है

राजधानी से निकलने वाले 850 टन कचरे में से लगभग 800 टन कचरा आदमपुर खंती पहुंचता है, लेकिन नगर निगम के पास केवल 420 टन कचरे के निष्पादन की ही क्षमता है, जिससे बाकी कचरा सीधे डंप हो रहा है। यही कचरा बिना किसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के जमा होकर जमीन को प्रदूषित कर रहा है। आदमपुर छावनी स्थित लैण्डफिल साईट पर जमा कचरे के पहाड़ को 31 मई 2024 तक खत्म करने का प्लान बनाया गया था। इसके लिए ट्रामल मशीनों की संख्या बढ़ाने के साथ इन्हें दो पालियों में चलाने की बात कही गयी थी पर हुआ कुछ नहीं।

एनजीटी लगा चुका है कई बार जुर्माना

दरअसल आदमपुर छावनी स्थित लैण्डफिल साईट में कचरे को नष्ट करने के लिये आग लगाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस साल अप्रैल में भी यहां बड़ी आग लग चुकी है। मामला एनजीटी तक पहुंचा और एनजीटी ने नगर निगम पर जुर्माना लगाते हुए यहां जमे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन करने को कहा था। लेकिन एक साल बाद भी निगम कचरे को खत्म नहीं कर सका। बल्कि हर महीने यहां कचरे के पहाड़ बढ़ते जा रहे हैं। इसके साथ बने बायो सीएनजी प्लांट सहित एनटीपीसी प्लांट, डेड एनिमल प्लांट की हालत भी खराब है।