प्रयागराज के करछना थाना क्षेत्र के भड़ेवरा बाजार में रविवार की शाम भड़की हिंसा भले ही नियंत्रण में आ गई हो, लेकिन इलाके में तनाव की स्थिति अब भी बनी हुई है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी के समर्थकों द्वारा किए गए बवाल के बाद से पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। हालात को देखते हुए हनुमान मोरी, भड़ेवरा बाजार और आसपास के संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल और पीएसी की तैनाती कर दी गई है।
गिरफ्तारियों के डर से फरार हो रहे कार्यकर्ता
पुलिस लगातार उपद्रव में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। कई कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के घरों पर पुलिस टीमों ने छापेमारी की, लेकिन अधिकतर लोग पहले से ही घर छोड़कर फरार हो चुके हैं। सोमवार सुबह तक 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था, वहीं 700 से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव के अनुसार, उपद्रव में संलिप्त चिन्हित लोगों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए आठ टीमें गठित की गई हैं, जो लगातार ऑपरेशन में जुटी हैं।
हिंसा का कारण बना सांसद चंद्रशेखर को रोकना
रविवार को आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भीम आर्मी के संस्थापक सांसद चंद्रशेखर रावण को सर्किट हाउस में पुलिस द्वारा रोके जाने की सूचना जैसे ही कार्यकर्ताओं तक पहुंची, आक्रोश फूट पड़ा। कार्यकर्ताओं ने भड़ेवरा बाजार में जमकर उत्पात मचाया। लाठी-डंडों और पत्थरों से उन्होंने लगभग 40 वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। दुकानों में तोड़फोड़ की गई और राहगीरों तथा दुकानदारों पर भी हमला किया गया।
पुलिसकर्मियों को भी नहीं बख्शा गया, उन पर पथराव कर उन्हें मौके से खदेड़ दिया गया। इस हिंसा में 12 पुलिसकर्मियों सहित कुल 35 लोग घायल हुए। जवाब में आक्रोशित ग्रामीणों ने भी पत्थरबाजी कर उपद्रवियों को खदेड़ना शुरू किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इस दौरान छह मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया गया।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई के बाद हालात नियंत्रण में
स्थिति को बिगड़ता देख, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय पाल शर्मा खुद मौके पर पहुंचे। उनके साथ कई थानों की पुलिस और पीएसी के जवानों ने मिलकर मोर्चा संभाला। सख्त कार्रवाई के बाद दोपहर करीब चार बजे शुरू हुआ बवाल ढाई घंटे बाद शांत हुआ।
घटना के तुरंत बाद करछना थाना प्रभारी अनूप सरोज की तहरीर पर 60 से ज्यादा नामजद और सैकड़ों अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
देवीशंकर की हत्या बना था विवाद का कारण
इस बवाल की जड़ें 13 अप्रैल को इसौटा गांव में अनुसूचित जाति के युवक देवीशंकर की हत्या से जुड़ी हैं। खेत में जली हुई अवस्था में उसकी लाश मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने जांच के बाद ठाकुर समुदाय के सात लोगों समेत कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। प्रशासन ने मृतक के परिजनों को आर्थिक मदद और जमीन का पट्टा देने का आश्वासन दिया था।
हालांकि, हाल ही में भीम आर्मी के स्थानीय नेताओं ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को कोई सहायता नहीं दी गई है और वे न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जब यह मामला सांसद चंद्रशेखर के संज्ञान में आया, तो उन्होंने मृतक के परिजनों से मिलने का फैसला किया। लेकिन पुलिस द्वारा उन्हें सर्किट हाउस से बाहर न निकलने देने की खबर फैलते ही कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया और स्थिति हिंसक हो गई।
स्थिति पर प्रशासन की नजर
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन प्रशासन कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। पुलिस का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और कानून व्यवस्था को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रशासन की कोशिश है कि इलाके में दोबारा ऐसी स्थिति न बने और साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए जरूरी कदम भी उठाए जाएं।