5 साल में 360 करोड़ खर्च, नहीं सुधरा सीवेज मैनेजमेंट, अब सौ करोड़ और खर्चेंगे

Sewage management Costs: बारिश के मौसम में शहर के सीवेज मैनेजमेंट सिस्टम की पोल खुल गयी है। महापौर हेल्पलाइन में रोज 250 शिकायतें सीवेज ब्लाक की आ रही हैं। हैरानी की बात तो यह है कि निगम शहर में पांच सालों में पांच सौ से ज्यादा करोड़ खर्च कर चुका है पर उसके बाद भी यह समस्या बरकरार है। हालत यह है कि 25 लाख से अधिक की आबादी में निगम के पास इसके केवल सात सहायक यंत्री और 10 मशीनें हैं। इनके भरोसे ही पूरे शहर के मैनेजमेंट करने का दावा किया जाता है।

शहर के 55% हिस्से में सीवेज लाइन नहीं

निगम अधिकारियों के अनुसार बीते पांच सालों में अमृत योजना के तहत शहर में सीवेज लाइन बिछाने में करीब 365 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। अब अमृत 2 योजना के चलते सीवेज पर 100 करोड़ रुपये और खर्च होने हैं। इसके बावजूद शहर के 45 फीसदी हिस्से में केवल 300 किमी की सीवेज लाइन ही बिछाई जा सकी है। जबकि राजधानी के 55 प्रतिशत हिस्से में अभी सीवेज लाइन नहीं डाली गई।

कहां कहां कितना पैसा खर्च किया गया

  • जेएनएनयूआरएम में सीवर के लिए 137 करोड़ से बड़े-छोटे तालाब के आसपास के इलाकों में नेटवर्क बिछाया गया था।
  • जेएनएनयूआरएम के गैप को पूरा करने और कनेक्शन करने पर प्रोजेक्ट उदय के तहत 82.13 करोड़ खर्च हुए।
  • अमृत -1 में 360 करोड़ से 300 किमी लंबी लाइनें बिछाने का दावा किया गया।
  • अमृत -2 में सौ करोड़ से अब सिस्टम को अपडेट करने की तैयारी।

न तो पर्याप्त लाइनें और न ही नेटवर्क

राजधानी में सीवेज नेटवर्क बिछाने के लिये जगह जगह टुकड़ों में काम किया गया पर हालत यह है कि आज भी शहर में जगह-जगह सीवेज खुले में बह रहा है। इसकी गंदगी व दुर्गंध से जहां रहवासी परेशान हैं, वहीं आम नागरिकों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। घरों का कनेक्शन सीवेज पाइप लाइन से नहीं होने के चलते कई कालोनियों में सामने सीवेज का तालाब बन गया है। रहवासियों द्वारा बार-बार शिकायत करने के बाद भी इससे छुटकारा नहीं मिल पाया है।